रायपुर (नईदुनिया, राज्य ब्यूरो)। Chhattisgarh Assembly News: विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक शिवरतन शर्मा ने समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी और उपार्जन केंद्रों को प्रदत्त राशि को लेकर सवाल किया। मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि 72 घंटे के भीतर धान उठाने का नियम है, लेकिन ये नियम तब बना था, जब खरीदी कम होती थी। आज 92 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई है। धान का उठाव मिलिंग के लिए होता है। एफसीआइ ने साठ लाख मीट्रिक टन चावल की डिमांड की थी, लेकिन नहीं लिया। अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने सहकारिता मंत्री और खाद्य मंत्री को निर्देश दिया कि जल्द से जल्द बैठक कर इस समस्या का समाधान ढूंढे। उन्होंने अगले सत्र में इस विषय पर आधे घंटे की चर्चा भी स्वीकृत की।

शिवरतन ने कहा कि उपार्जन केंद्रों में धान नहीं उठाने से सूखत बढ़ रहा है। मंत्री कह रहे हैं कि 72 घंटे का नियम है, लेकिन बीते सात महीनों में उठाव नहीं हुआ। परिवहन नहीं होने का दोषी कौन है? सुनियोजित ढंग से उपार्जन केंद्रों से धान रोका गया। इसकी वजह से सारी सहकारी समिति बैठ गई है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने आसंदी से कहा, आपको हस्तक्षेप करना होगा। धर्मजीत सिंह ने कहा कि असली समस्या मंत्री खुद हैं। धान खरीदी की नैतिक जिम्मेदारी किसकी है।

आसंदी सरकार को निर्देशित करे कि कौन मंत्री इस पर जवाब देगा। अध्यक्ष ने मंत्री अमरजीत भगत से पूछा कि दोषी कौन है? क्या कार्रवाई होगी? ये बता दीजिए। भगत ने कहा कि धान के रखरखाव के लिए 52 रुपये क्विंटल समिति को दिया जाता है। इसमें प्रासंगिक व्यय नौ स्र्पये है। अध्यक्ष ने कहा कि समिति को होने वाले नुकसान की भरपाई पर पुनर्विचार कौन करेगा? भगत ने कहा कि खाद्य विभाग ही करेगा। विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार प्रासंगिक व्यय के रूप में 18 स्र्पये दे रही है, तो राज्य सरकार सिर्फ नौ स्र्पये क्यों दे रही है।

रमन बोले-आदिवासी क्षेत्रों की जगह पाटन में खोल दिए चार आत्मानंद स्कूल

पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल का मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि शिक्षकों और अन्य अमले की नियुक्ति की अर्हता क्या है? स्कूल का सेटअप क्या होगा? मंत्री टेकाम जब इसका जवाब नहीं दे पाए तो रमन ने कहा कि 170 नए स्कूल खोलने की घोषणा हुई थी, लेकिन शिक्षा मंत्री को सेटअप की जानकारी नहीं है। अर्हता नहीं मालूम है। पांच हजार पदों पर शिक्षा विभाग के मूल पदों के लोगों को लेकर आएंगे तो बाकी स्कूलों का क्या होगा? प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि बस्तर से सरगुजा तक आदिवासी इलाकों में चार-चार स्कूल खोलें, लेकिन पाटन जैसे मैदानी इलाकों में चार-चार स्कूल खोल दिए गए। टेकाम ने कहा कि ऐसा कोई ब्लाक नहीं है, जहां आत्मानंद स्कूल नहीं खोला गया है। रमन ने बताया कि खैरागढ़ में नहीं खुला है। ऐसे और भी ब्लाक हैं।

सदन में उठा शिक्षा का अधिकार का मुद्दा

विधायक धर्मजीत सिंह ने शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों के प्रवेश लक्ष्य पर सवाल किया। मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बताया कि वर्ष 2019-20 में 81242 आरक्षित सीट रही, जिसमें सिर्फ 48 हजार 167 बच्चों को प्रवेश मिला। वर्ष 2020-21 के लिए आरक्षित सीटें 81 हजार 242 थी, जिसमे 52 हजार 689 बच्चों को प्रवेश मिला। अल्पसंख्यक वर्ग की संस्थाओं में यह प्रक्रिया लागू नहीं होती. क्योंकि कानून में इसका प्रविधान नहीं है।

Posted By: Kadir Khan

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