रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) 12वीं के पर्यावरण विषय के परीक्षा शुल्क के नाम पर प्रति छात्र 60 रुपये वसूल रहा है। जबकि यह परीक्षा न ही माशिमं लेता है और न ही इसके लिए कोई व्यवस्था करता है। 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में अब पर्यावरण का अलग से होने वाला पर्चा भी खत्म हो गया है। पर्यावरण के सभी चेप्टर अलग-अलग विषयों में समायोजित कर दिए गए हैं, लेकिन प्रोजेक्ट के नाम से 12वीं के बच्चों से फीस ली जा रही है।

इस साल पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। प्रश्नपत्र नहीं छपेगा। बाह्‌य परीक्षक की नियुक्ति भी नहीं की जाएगी। मूल्यांकन कार्य भी बोर्ड नहीं करेगा। ऐसे में एक बार फिर पौने तीन लाख बच्चों से वसूली का टारगेट रखा गया है। पर्यावरण प्रोजेक्ट शुल्क से माशिमं को करीब दो करोड़ रुपये की आमदनी होगी। जानकार इसे अनुचित बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण का जब अलग से कोई पर्चा नहीं है तो उस विषय में अलग से प्रोजेक्ट का औचित्य नहीं है। इस प्रयोगात्मक मूल्यांकन को भी अन्य विषयों में समाहित कर देना चाहिए। जानकारों के अनुसार पर्यावरण विषय के लिए माशिमं की ओर से किसी भी प्रकार से मानदेय व्यय नहीं होगा। 12वीं पर्यावरण विषय के अंक की ऑनलाइन एंट्री, परीक्षक, मूल्यांकन कार्य स्थानीय स्कूल स्तर पर ही होनी है।

पर्यावरण के नहीं जुड़ते अंक फिर भी शुल्क

दिलचस्प बात यह है कि पर्यावरण पर प्रोजेक्ट और अध्ययन करने के बाद भी इसके अंक महायोग में नहीं जुड़ते हैं। इसके बाद भी परीक्षार्थियों को शुल्क अदा करना पड़ रहा है। माशिमं की पाठ्यचर्या समिति ने 23 जुलाई 2018 को पर्यावरण अध्ययन विषय पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के परिपालन में निर्णय लिया था कि 11वीं- 12वीं पर्यावरण अध्ययन का वर्तमान पाठ्यक्र के अनुसार अध्यापन कार्य और दो प्रोजेक्ट अनिवार्यतः कराए जाएं। स्कूल स्तर पर 50 अंक की परीक्षा आयोजित करके अंक माशिमं को भेजने का प्रावधान है। इनमें प्राप्त अंकों को अंकसूची में पृथक से दर्शाया जाता है।

15 सितंबर तक मंगाए हैं आवेदन

माशिमं ने सत्र 2019-20 बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 10वीं-12वीं और वोकेशनल के नियमित परीक्षार्थियों के लिए 15 सितम्बर तक आवेदन मंगाए गए हैं। हाई स्कूल के परीक्षार्थियों को आठवीं और नौवीं कक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा मार्च 2019 की परीक्षा में फेल होने वाले परीक्षार्थी शामिल हो सकेंगे। माशिमं या किसी अन्य संस्थान से 10वीं में अनुत्तीर्ण को पात्रता होगी। इसी तरह 12वीं के परीक्षार्थियों के लिए 10वीं और 11वीं परीक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र देना होगा। माशिमं या किसी अन्य बोर्ड से 12वीं की परीक्षा अनुत्तीर्ण छात्र पात्र होगा। यदि किसी परीक्षार्थी ने एक साल तक पढ़ाई नहीं की है तो उसे गेप सर्टिफिकेट देना पड़ेगा। गौरतलब है कि हर साल 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में पौने सात लाख परीक्षार्थी शामिल होते हैं।

विषय की नहीं, प्रोजेक्ट की परीक्षा होती है

पर्यावरण के लिए कोई अलग से परीक्षा नहीं होती है पर इसकी प्रोजेक्ट की परीक्षा होती हैं। अंकों की एंट्री माशिमं करता है और इसके अंकों को महायोग से नहीं जोड़ते हैं। - प्रो. वीके गोयल, सचिव, माशिमं

जिसकी परीक्षा नहीं, उसकी फीस लेना अनुचित

जिस विषय की माशिमं परीक्षा नहीं लेता है उसकी फीस लेना अनुचित है। फीस बढ़ाना है तो माशिमं ऐसे ही बढ़ा सकता है। पर्यावरण विषय को तो सभी विषयों में समाहित कर दिया गया है। - प्रकाश यादव, पूर्व सदस्य माशिमं

प्रोजेक्ट वर्क भी समाहित कर देना चाहिए

जिस तरह पर्यावरण के सभी चेप्टर को अन्य विषयों में समाहित कर दिया गया है उसी प्रकार इसके प्रोजेक्ट वर्क को भी समाहित कर देना चाहिए। इससे बच्चों पर फीस का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। - संजय जोशी, पूर्व सदस्य माशिमं