रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि ई कामर्स के लिए अनिवार्य जीएसटी की शर्त को हटाया जाए। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के विपरीत है। कैट का कहना कि इस विसंगति को तत्काल समाप्त किया जाए।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि एक ओर पीएम मोदी के विजन के अनुसरण में बहुत से मंत्रालय और राज्य सरकारें ई कामर्स प्लेटफार्म पर अधिक से अधिक विक्रेताओं को लाने के लिए उत्सुक है। लेकिन जीएसटी नंबर के बिना विक्रेताओं को अनुमति नहीं देने पर देश के लाखों व्यापारी द्वारा डिजिटल कामर्स को अपनाना रोड़ा बन गया है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पारवानी ने कहा कि छोटे खुदरा विक्रेताओं का सालाना कारोबार 40 लाख रुपये से कम है और उन्हें जीएसटी पंजीकरण लेने की छूट है। ऐसे में छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल कामर्स को कैसे अपना सकते हैं।

जीएसटी नंबर शर्त को हटाना जरूरी

कैट के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी और कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव ने कहा कि किसी भी ई कामर्स पोर्टल पर आनबोर्ड करते समय जीएसटी नंबर की शर्त को हटाना जरूरी है। प्रमाणीकरण के उद्देश्य से, आधार संख्या, बैंक खाता विवरण या इसी तरह के अन्य उपायों को ई कामर्स पोर्टल पर आनबोर्डिंग के लिए आवश्यक योग्यता के रूप में किया जा सकता है।

चीनी उत्पादों का भी विरोध

कैट द्वारा इन दिनों चीनी उत्पादों का भी विरोध कियाजा रहा है। इसके लिए कारोबारियों के साथ ही आम उपभोक्ताओं को भी जागरुक किया जा रहा है। कैटका कहना है कि अब बाजारों में अधिक से अधिक भारत में बनने वाली वस्तुएं ही अधिक होनी चाहिए।

Posted By: Kadir Khan

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