रायपुर। नागरिकता संशोधन अधिनियम (एनआरसी) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनपीआर) पर राजनीतिक बयानबाजी और विवादित बोल का सिलसिला स्र्कने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने एनआरसी पर हमला किया है। लखमा ने कहा कि आदिवासियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस तरह का कानून आएगा। यह आदिवासियों के गले का फंदा है। लखमा के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने पलटवार किया। डॉ रमन ने कहा कि कम से कम अपने प्रधानमंत्रियों के बारे में तो अपशब्द न बोलें।

सर्किट हाउस में आदिवासियों से जुड़े विषयों पर तीन दिवसीय शोध संगोष्ठि का आयोजन किया गया है। शनिवार को इस संगोष्ठी में आबकारी मंत्री लखमा ने कहा कि भारत सरकार का यह काला कानून है। इसके खिलाफ आदिवासियों को लड़ना चाहिए। आदिवासी अंग्रेज हुकुमत के समय से जंगल में रहता है।

वह कहां से प्रमाण पत्र लाएगा। नक्सल को गोली से नहीं बातों से विकास समझाएंगे। 15 सालों में भाजपा ने आदिवासियों को पीछे धकेलने का काम किया। कांग्रेस सरकार में आदिवासियों को जेल से छुड़ाने का काम किया जा रहा है। भाजपा ने सलवा जुडूम के माध्यम से घर जलाने का काम किया, जिसे आदिवासी कभी माफ नहीं करेंगे।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने पटलवार करते हुए कहा कि असम समझौता राजीव गांधी ने किया था। उसको काला कानून बोलते हैं। मनमोहन सिंह इसको आगे बढ़ाए, उसको काला कानून बोलते हैं। इस तरह अपने प्रधानमंत्रियों के बारे में तो अपशब्द ना बोले। कम से कम एनआरसी के बारे में पढ़ लें, समझ लें, फिर कोई बात करें।

कवासी जिसे काला कानून बता रहे हैं, वह बतौर प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम में लागू किया था। इससे कांग्रेस के दो-दो प्रधानमंत्री जुड़े रहे। यह कोई पूरे देश का कानून नहीं है, सिर्फ असम के लिए एक रजिस्टर बनाने की बात हुई थी। मंत्री जी को ये मालूम होना चाहिए कि उनके प्रधानमंत्री काला कानून पर हस्ताक्षर करते हैं।

Posted By: Sandeep Chourey

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