रायपुर । विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में प्रस्तावित बिजली की नई दरों पर जनसुनवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को पहले दिन घेरलू, कृषि और गैरघरेलू उपभोक्ताओं ने दरों को लेकर आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। उपभोक्ताओं ने बिजली कंपनी के 3200 करोड़ रुपए के नुकसान की बात को गलत साबित करने की कोशिश की। कहा कि कंपनी के हिसाब-किताब गड़बड़ी है। कंपनी ने करीब 46 सौ करोड़ स्र्पये से अधिक के हिसाब को शामिल ही नहीं किया है। कंपनी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा हो रहा है, इसलिए राज्य में बिजली की दर न बढ़ाई जाए।

कंपनी की गलती की सजा उपभोक्ता को न दें

सुनवाई के दौरान मड़वा बिजली संयंत्र से तेलंगाना को बेची जा रही बिजली का मुद्दा भी उठा। विद्युत उपभोक्ता महासंघ के अध्यक्ष श्याम काबरा ने आयोग से कहा कि 2017- 18 में कंपनी ने चार स्र्पये 47 पैसे के स्थान पर चार स्र्पये 13 पैसे प्रति यूनिट की दर से तेलांगाना को बिजली बेची। इससे कंपनी को 183 करोड़ का नुकसान हुआ।

कंपनी अब इस नुकसान की भरपाई आम उपभोक्ताओं से करना चाह रही है। इसी तरह कंपनी ने अपने प्रस्ताव में कृषि से प्राप्त राजस्व को करीब 724 करोड़ स्र्पये कम करके बताया है। घरेलू उपभोक्ताओं से प्राप्त राजस्व में 457 और गैर-घरेलू से प्राप्त राजस्व में 29 करोड़ कम करके बताया गया है। इसी तरह 2017-19 में स्टील सेक्टर की सब्सिडी में 472 करोड़ स्र्पये का जिक्र नहीं है।

सब्सिडी की राशि बैंक खाते में जमा हो

बिजली उपभोक्ताओं को सरकार की तरफ से दी जा रही सब्सिडी की राशि का उपभोक्ताओं को नगद भुगतान की भी मांग आयोग से की गई। मोहन एंटी ने कहा कि सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा की जाए। उन्होंने बिजली की दर 25 फीसद बढ़ाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने मछलीपालन को भी कृषि की श्रेणी में रखने की मांग की।

Posted By: Sandeep Chourey

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