रायपुर। नईदुनिया, राज्य ब्यूरो। धान का प्रति क्विंटल 2500 स्र्पये दाम देने के वादे को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार मशक्कत कर रही है। इसके लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई गई है। सोमवार को समिति की पहली बैठक हुई। इसमें केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि, ओडिशा की कालिया के साथ तीन अन्य राज्यों में चल रही योजनाओं के अध्ययन का फैसला किया गया है।

हालांकि इनमें सबसे सटीक केंद्र सरकार की सम्मान निधि योजना है, जिसके तर्ज पर नई योजना बनाकर फंड का प्रावधान किया जा सकता है। समिति के पास रिपोर्ट देने के लिए तीन फरवरी तक का वक्त है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि समिति सम्मान निधि की तरह की कोई योजना शुरू करने की सिफारिश कर सकती है।

कृषि विभाग के अफसरों के अनुसार उपसमिति ने अफसरों को देशभर में चल रही किसान सहायता योजनाओं की जानकारी एकत्र करने का निर्देश दिया था। विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि ओडिशा के अलावा केरल, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में किसानों के लिए सहायता योजनाएं राज्य सरकार चला रही हैं जिनमें किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है। हालांकि इनमें कुछ योजनाएं छत्तीसगढ़ में चल रहीं जो बिना ब्याज के अल्पकालीन कृषि ऋण के समान ही है।

किसानों को अंतर की राशि कैसे दें, बताएगी समिति

राज्य सरकार फिलहाल केंद्र से घोषित 1815 और 1835 स्र्पये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को धान का भुगतान कर रही है। वादे के मुताबित सरकार को मोटा धान बेचने वाले किसानों को 685 और पतला धान बेचने वालों को 665 स्र्पये अतिरिक्त भुगतान करना है। यही राशि कैसे किसानों को दी जाए, इसके लिए मंत्रिमंडलीय

इस वजह से सीधे 25 सौ नहीं दे पा रही सरकार

पिछले वर्ष सरकार ने किसानों को सीे ही 2500 स्र्पये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया था। इस बार ान खरीद शुरू होने से पहले ही केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति कर दी। समझौते समेत अन्य कारणों का हवाला देते हुए केंद्र ने स्पष्ट कहा कि यदि राज्य सरकार किसानों को बोनस देगी तो वह राज्य के चावल नहीं खरीदेगी।

राज्य सरकार झुकी तो केंद्र हुआ खरीद को राजी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य से केंद्रीय पूल में चावल लेने का आग्रह करते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि और खाद्य मंत्री को पत्र लिखा। केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात भी की, लेकिन केंद्र सरकार राजी नहीं हुई। ऐसे में राज्य सरकार ने विवश होकर केंद्र सरकार से घोषित समर्थन मूल्य पर ही धान खरीद कर रही है। इसके बाद केंद्र केंद्रीय पूल में 24 लाख मीट्रिक टन चावल लेने को राजी हुई है।

छत्तीसगढ़ में धान की खेती

राज्य में करीब 50,84049 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। खरीफ सीजन 2018-19 राज्य में करीब 25 लाख 60 हजार 143 हेक्टेयर में धान की फसल लगाई गई थी। इस वर्ष यह रकबा बढ़कर 27 लाख 51 हजार 688 पहुंच गई है। यह आंकड़ा किसानों के पंजीयन के आधार पर है। इसी तरह पिछले वर्ष कुल 16 लाख 97 हजार 890 किसाों ने पंजीयन कराया था। इनमें से करीब 12 लाख किसानों ने ही सोसायटी में धान बेची थी। इस वर्ष पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या 19 लाख 70 हजार 571 है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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