रायपुर। नईदुनिया, राज्य ब्यूरो। कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल से लेकर आंगनाबड़ी केंद्र तक बंद हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन बच्चों को घर पहुंचाकर दे रही है ताकि उन्हें पौष्टिक भोजन मिलता रहे। राज्य सरकार के इस संवेदनशील पहल की सराहना पूरे देश में की जा रही है। एक राष्ट्रीय दैनिक ने मिड डे मील योजना को लेकर विभिन्न राज्यों की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की गई है।

मिड डे डेफिसिट रिपोर्ट में देश के अन्य राज्यों में उठाएं गए कदमों का तुलनात्मक विवरण प्रकाशित किया गया है। इस रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की पहल को पूरे देश के लिए अनुकरणीय बताया गया है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मार्च में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के लिए जब देश में लॉकडाउन लागू किया जा रहा था राज्य सरकार ने स्कूली बच्‍चों को लॉकडाउन के 40 दिनों का सूखा राशन का वितरण किया।

कर्फ्यू लागू होने के एक दिन पहले ही जारी कर दिया आदेश देश में लॉकडाउन से पहले 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया गया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने 21 मार्च को ही सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूली बच्‍चों को सूखा राशन वितरण करने के संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए। गांव गांव इसकी मुनादी करायी गई। वहीं अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रकिया काफी बाद में शुरू की गई।

पहले 40 फिर 45 दिन का दिया गया राशन

छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्‍चों को सूखा राशन दिया गया। बाद में 45 दिनों के लिए सूखा राशन वितरित किया गया। प्रदेश के 43,000 स्कूलों में 29 लाख बच्‍चों इस योजना से लाभान्वित हुए। वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दालें, नमक और अचार थे। स्वयं सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर-घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलीवरी की जाए।

बाकी राज्यों में 10 जुलाई के बाद शुरू हुआ वितरण रिपोर्ट के अनुसार उत्तरप्रदेश, गोवा, तमिलनाडु और तेलंगाना में स्कूली बच्‍चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन देने का काम 10 जुलाई के बाद ही शुरू किया गया। मध्यान्ह भोजन योजना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड शामिल हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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