रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार अवैध कब्जे वाली सरकारी (नजूल) जमीन को खाली नहीं कराएगी, बल्कि कलेक्टर गाइडलाइन रेट की डेढ़ गुना कीमत लेकर कब्जेधारी के नाम कर देंगे। मुख्यमंत्री निवास में मंगलवार को मंत्रिमंडल की हुई बैठक इस फैसले पर मुहर लगा दी है, लेकिन यह 20 अगस्त 2017 से पहले कब्जे वाली जमीन पर लागू होगी।

अभी रिहायशी और व्यवसायिक क्षेत्र में नजूल की खाली जमीन भी नीलाम करने का फैसला लिया है। यह कदम कर्ज के बोझ को कम कर खजाने को भरने के लिए उठाया है। बैठक के बाद मंत्री रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर और जयसिंह अग्रवाल ने बताया कि 7500 वर्ग फीट तक की सरकारी जमीन को बेचने का फैसला कलेक्टर ले सकेंगे, जबकि इससे बड़े भूखंड का फैसला सरकार लेगी।

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कब्जाधारी जब आवेदन देगा, तो गूगल एप से यह पता लगाया जाएगा कि जमीन पर कब्जा कब हुआ, उसके बाद बेचने या नीलाम करने का फैसला लिया जाएगा। अगस्त 2017 के बाद से हुए कब्जे को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

- सौर सुजला योजना के तहत 21 सौ सुराजी गांवों में बनने वाले गोठानों में सोलर पंप लगेंगे।

- खेल प्राधिकरण का गठन होगा सीएम अध्यक्ष, खेल मंत्री उपाध्यक्ष रहेंगे। दो विधायक, एक सांसद और खेल से जुड़े लोग सदस्य होंगे।

- संग्रहण केंद्रों में बचे छह लाख मीट्रिक टन धान और गन्ने के रस से बायो इथेनॉल बनाया जाएगा।

- बस्तर, सरगुजा, कोरबा और बिलासपुर के अनुसूचित क्षेत्रों में कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड बनेगा।

- रियल स्टेट प्रोजेक्ट में बिकने वाले मकानों का रजिस्ट्री शुल्क चार से घटाकर दो फीसद कर दिया है।

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