रायपुर। राजधानी में संचालित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में लंबे समय से न्यूरोजॉली और गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट के चिकित्सक नहीं हैं। इसके चलते यहां संबंधित रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आपको बता दें कि वर्तमान में एम्स में न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के मरीजों का उपचार जनरल मेडिसिन विभाग के माध्यम ये किया जा रहा है। जनरल मेडिसिन विभाग इन मरीजों की देखरेख कर रहा है। वहीं स्थिति गंभीर होने या इलाज नहीं हो पाने के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों में एम्स द्वारा रेफर किया जा रहा है। इससे पीड़ितों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रबंधन भी दिक्कतों को देखते हुए न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चिकित्सकों की तलाश कर रहा है, ताकि पीड़ितों का इलाज सुचारू रूप से किया जा सके। एम्स प्रबंधन का कहना है कि एम्स में न्यूरोलॉजी में डॉक्टर थे, लेकिन वे प्राइवेट प्रैक्टिस में चले गए हैं। इसके साथ ही गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पर फोकस कर रहे हैं। यहां चिकित्सक नहीं हैं। न्यूरोलॉजी के लिए अलग से विज्ञापन निकालेंगे, ताकि यहां किसी तरह की दिक्कत न हो।

32 चिकित्सकों की होगी संविदा नियुक्ति

चिकित्सकों की दिक्कत से जूझ रहा एम्स 32 डॉक्टरों की 11 महीने के लिए संविदा नियुक्ति करने जा रहा है। इसमें न्यूक्लियर मेडिसिन, हिमेटोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी के कई चिकित्सक शामिल हैं। इनकी नियुक्ति को लेकर इसी महीने इंटरव्यू लिया जाएगा, ताकि जल्द ही उन्हें ज्वाइनिंग दी जा सके।

- 32 चिकित्सकों की संविदा नियुक्ति के लिए नाम मंगवाए जा रहे हैं। प्रक्रिया के बाद जल्द ही इनकी नियुक्ति की जाएगी। न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चिकित्सक हमारे पास नहीं है। फोकम अभी इनकी नियुक्त पर है। वर्तमान में इनके वार्ड जनरल मेडिसिन को दे दिया गया है। जनरल मेडिसिन विभाग इन मरीजों की देखरेख कर रहा है। न्यूरोसर्जरी और जनरल मेडिसिन मिलकर इलाज कर रहे हैं। मरीज वापस न लौटे इसकी पूरी कोशिश रहती है। - डॉ. नीरेश शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, एम्स

Posted By: Nai Dunia News Network

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