रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: कोरोना महामारी के कारण पिछले शिक्षा-सत्र में सभी बच्चों को पास कर दिया गया। इस व्यवस्था के तहत वे बच्चे भी अगली कक्षा में पहुंच गए, जो पढ़ाई-लिखाई में बेहद कमजोर हैं। लेकिन अब उनकी भी शिक्षा की रीढ़ मजबूत करने की जरूरत है।

इसके लिए बेहद जरूरी है कि उन्हें समय से पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएं। राज्य सरकार की व्यवस्था के अनुसार इस साल पुस्तकें बच्चों के घर तक पहुंचाई जाएंगी। यह निर्णय सराहनीय है, लेकिन बच्चों को इस सुविधा का लाभ तभी मिल पाएगा, जब सही क्रियान्वयन होगा।

शासकीय और निजी विद्यालयों के बच्चों के घर तक 15 जुलाई के पहले पुस्तकें पहुंचानी हैं। लेकिन इतने कम समय में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम शासकीय, अनुदान प्राप्त शालाओं, मदरसों, गैर अनुदान प्राप्त शासकीय शालाओं के कक्षा पहली से 10वीं तक के लगभग 55 लाख 86 हजार 866 विद्यार्थियों को निश्शुल्क पाठ्य पुस्तकें कैसे वितरित कर पाएगा, यह एक चुनौती है।

ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि कक्षा पहली से 8वीं तक के विद्यार्थियों को पुस्तकें संकुल स्तर तक पहुंचाई जाएंगी। यहां से संकुल प्रभारियों द्वारा संबंधित शालाओं के प्रधान पाठक, शिक्षकों के माध्यम से पुस्तकें वितरित कराई जाएंगी। पुस्तक प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों से पावती ली जाएगी, जो किसी विवाद या जांच के समय प्रस्तुत की जाएगी।

गत वर्ष भी किताबों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन बेहतर क्रियान्वयन न होने से नवंबर तक किताबें पहुंचती रहीं। पिछली गलती से सबक लेते हुए इस बार की कार्ययोजना पहले ही तैयार करनी चाहिए थी, लेकिन यह नहीं हो सका। यह दूरदर्शिता का अभाव ही कहा जा सकता है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जो बाढ़ आदि के कारण मुख्य मार्ग से कट जाते हैं, वहां समय रहते पुस्तकें पहुंचा पाना चुनौतीपूर्ण काम होगा।

हालांकि ऐसे क्षेत्रों में ड्रोन की मदद भी ली जा सकती है। पुस्तक वितरण की व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्र और बेहतर कनेक्टिविटी के अभाव वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए। निगम की वेबसाइट में पुस्तकों की साफ्ट कापी उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में जो विद्यार्थी आनलाइन पढ़ना चाहें, उन्हें चयन का विकल्प हो। पुस्तक वितरण को एक कार्य न मानें। यह बच्चों के लिए आवश्यक है।

इसके माध्यम में उनमें पढ़ने, बोलने, लिखने, सोचने और कल्पना शक्ति का विकास होता है। कोरोना के कारण अपनी कर्मस्थली 'विद्यालयों' से दूर विद्यार्थियों में इनकी उपस्थिति ऊर्जा का संचार करेगी। स्कूल वापसी में समय है, लेकिन किताबों को पहुंचाकर हम एक कदम आगे बढ़ेंगे। नई किताबों के मिलने से जो प्रसन्न्ता बच्चों के चेहरे पर दिखती है, उसे फिर से वापस ला सकेंगे। सरकार के साथ समाज के बाकी सक्षम लोग भी इस कार्य योजना से जुड़ें, जिससे निर्धारित समय में पुस्तकों का वितरण हो सके।

Posted By: Azmat Ali

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags