रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: कोरोना महामारी की चपेट में आने के कारण अभिभावक खो देने वाले बच्चों की पूरी पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाकर प्रदेश सरकार ने भविष्य की चिंता की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ से महतारी दुलार योजना के तहत इस सकारात्मक पहल का परिणाम भले आज सामने नहीं आए, लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार की सहायता और छात्रवृत्ति से पढ़ने वाले बच्चे कल की तारीख में आत्मनिर्भर बनने में जरूर सफल रहेंगे।

इस व्यवस्था का प्रदेश के मानव संसाधन विकास में अहम योगदान रहेगा। कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने उपार्जक खो दिए हैं। पिछले डेढ़ महीने से लाकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था एक बार फिर बेपटरी हो गई है। निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग बेरोजगार हो गए हैं। उद्योग और कारोबार प्रभावित होने के कारण जीवन यापन के लिए उन पर निर्भर परिवारों की स्थिति दयनीय हो गई है।

इसी दौर में कोरोना ने बड़ी संख्या में लोगों को चपेट में लिया, जिसके कारण प्रदेश में दस हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी लहर के थमने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि स्कूल जाने वाले कितने बच्चों ने अपना अभिभावक खो दिया। छात्रवृत्ति के रूप में एक हजार रुपये प्रतिमाह तक भुगतान की व्यवस्था ऐसे छात्रों के लिए काफी उपयोगी होगी।

प्रदेश के उदार हृदय निजी स्कूलों ने भी इस दिशा में पहल की है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पहले से उक्त निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) के तहत पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने की सरकार की तरफ से स्वीकृति दे दी जाएगी। इससे प्रभावित विद्यार्थियों के साथ-साथ निजी स्कूलों को भी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री की तरफ से सक्रियता बढ़ाए जाने के बाद प्रदेश में कोरोना की रफ्तार भी धीमी पड़ी है। महामारी में अभिभावक खो देने बच्चों के जीवन में आए खालीपन की भरपाई तो संभव नहीं है, परंतु उनका भविष्य संवारने में सरकार का प्रयास काफी अहम साबित हो सकता है। इसके लिए जरूरी होगा कि प्रभावित बच्चों की जल्द से जल्द पहचान की जाए और उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं।

इस योजना के साथ ही ऐसे बच्चों के परिवार की सामाजिक सुरक्षा पर भी विचार करना होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार भविष्य में परिवार का मुखिया खो चुकी माताओं को स्वावलंबी बनाने के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और ब्याज मुक्त ऋण योजना पर भी विचार करेगी।

कोरोना की लहर गुजरने के बाद ही आकलन किया जा सकेगा कि समग्र रूप से कितना नुकसान हो चुका है। कर्ज लेकर स्वजन के इलाज कराने के बाद भी उन्हें खो देने वालों के सामने गंभीर चुनौतियां होंगी। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का ईमानदारी से कार्यान्वयन सुनिश्चित कराने में मुख्यमंत्री के समक्ष महती जिम्मेदारी है।

Posted By: Azmat Ali

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