रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर में दर्ज गिरावट से उम्मीद बंध रही है कि अप्रत्याशित मौतों का सिलसिला रुकेगा। लगभग डेढ़ महीने तक इस बीमारी ने जमकर तबाही मचाई और शायद ही कोई घर-परिवार बचा हो, जिसे वायरस ने प्रभावित नहीं किया। सामाजिक-आर्थिक तानाबाना बिखर कर रह गया। देखते ही देखते अड़ोस-पड़ोस के घरों में मातम पसर गया।

कई घरों के मुखिया गुजर गए तो कई घरों से बड़े-बुजुर्गों का साया उठ गया। परिवार कर्ज में डूब गए। यह भी सच है कि इस दौर में कई ऐसे चेहरे भी सामने आए, जिन्होंने आपात को अवसर बना लिया। एक तरफ जहां प्रशासन और चिकित्सा जगत के लोग जिंदगियां बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, दूसरी तरफ गिद्ध दृष्टि वालों को बीमारों के स्वजनों को लूटने की छूट मिल गई।

जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी ने संवेदनहीन लोगों का चेहरा समाज के समक्ष उजागर किया। इन सबके बीच राहत इस बात से ही है कि डेढ़ महीने बाद ही सही, प्रतिदिन मिलने वाले संक्रमितों का आंकड़ा पांच हजार से कम हो गया है। यहां ध्यान रखना होगा कि थोड़ी-सी लापरवाही बरती गई तो इस आंकड़े के फिर विस्फोटक हो जाने में समय नहीं लगेगा।

सामाजिक सतर्कता, संक्रमितों से शारीरिक दूरी और प्रशासनिक सख्ती से ही इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि सभी को यह बात समझ आ गई है कि वर्तमान चिकित्सकीय सुविधाएं नाकाफी हैं। सरकारों को नहीं चाहते हुए भी लाकडाउन घोषित करना पड़ा। आक्सीजन और रेमडेसिविर की कमी का जिस जोर-शोर से हल्ला मचा, उसका खामियाजा सबसे ज्यादा मरीजों और उनके स्वजनों को भुगतना पड़ा।

अब यह बात भी सामने आ रही है कि आक्सीजन सिलिंडरों के कारण ही मधुमेह पीड़ितों को कोरोना मुक्त होने के बाद भी ब्लैक फंगस ने चपेट में ले लिया और अप्रत्याशित रूप से ऐसे लोगों की आंखें खराब हो रही हैं। यह ध्यान रखना होगा कि संक्रमण की दर कम हो रही है, इस बीमारी से पूर्ण छुटकारा नहीं मिल रहा है। वैज्ञानिक और चिकित्सक तीसरी लहर के प्रति बार-बार सचेत कर रहे हैं।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सभी लोग इसके गंभीरता से लेंगे। संभव है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तथा कारोबारियों के दबाव में प्रदेश सरकार को लाकडाउन खत्म करने का भी निर्णय लेना पड़े, परंतु आम लोगों को अपने घर परिवार की चिंता करनी होगी। कोरोना के लिए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के प्रति प्रशासन को सख्ती से पेश आना ही होगा।

यह सत्य स्थापित हो चुका है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले सिर्फ अपने ही नहीं, दूसरों की जान के भी दुश्मन हैं। भले ही वे कितने भी प्रभावशाली व्यक्ति या उनके स्वजन क्यों न हों, ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Posted By: Azmat Ali

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