रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: राजधानी रायपुर में लाकडाउन की घोषणा होने के बाद गुरुवार को पूरा शहर बाजार में नजर आया। सभी लोगों की आंखों में बेचैनी, हड़बड़ाट और खौफ का मिश्रण था। यह जानते हुए भी कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए शारीरिक दूरी जरूरी है, शासनादेश के घबराए लोग धक्कम-धक्का करते हुए बाजारों में जरूरी सामान खरीद रहे थे। निश्चित तौर पर कोरोना बढ़ाने में यह स्थिति और घातक तरीके से काम करेगी।

इस हालात के पीछे दोतरफा खौफ मुख्य कारण रहा। एक तरफ लाकडाउन के दौरान सब्जी और राशन दुकानों को बंद करने का सत्ता-शासन का आदेश है तो दूसरी तरफ इसकी वजह से अगले नौ दिनों तक परिवार के सामने भोजन की समस्या आने की आशंका। इसी वजह से सुबह से ही अनाज, सब्जी आदि मूलभूत जरूरत की चीजें खरीदने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।

साथ ही मुनाफाखोरों ने भी मनमानी शुरू कर दी। आलू-प्याज से लेकर टमाटर-नींबू तक के भाव बेकाबू हो गए। इस तरह कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए लिए गए निर्णय ने ही उसके विस्तार की परिस्थिति निर्मित कर दी। सवाल यह भी उठता है कि हर बार 'आग लगने पर कुआं खोदने' वाली रणनीति ही क्यों देखने को मिलती है? फरवरी की शुरुआत में ही अन्य राज्यों से कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि की खबरें मिलने लगी थीं।

उस समय बार-बार चेताए जाने पर भी सरकार भीड़ नियंत्रण की बात सुनने को तैयार नहीं थी। वैक्सीन को लेकर भी विवाद हुआ। पूरी व्यवस्था बीमारी के प्रसार और भयावहता का आकलन करने में असमर्थ रही। अब जब कोरोना संक्रमण तमाम प्रयासों के बाद भी नियंत्रित नहीं हो सका है तो पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर है। निर्णय की एक श्रृंखला सत्ता-शासन की है जो जवाबदेही एक-दूसरे के सिर पर डालने में सक्षम है और यही अनिर्णयकारी स्थिति कोरोना वायरस के श्रृंखला विस्तार का कारक बन गई है।

जिंदगी पटरी पर लौट रही थी, परंतु समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। व्यवस्थापकों ने शारीरिक दूरी सुनिश्चित कराई होती तो लाकडाउन की नौबत नहीं आती। केंद्र और राज्य के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन इस गंभीर चुनौती से उबरने में अहम भूमिका निभाता रहा है। इन सबके बीच प्रशासन स्तर से अव्यावहारिक आदेश जारी होना दुखद है। कोई भी आदेश जारी करने से पहले संभावित चुनौतियों पर विचार किया जाना चाहिए था।

प्रशासन से अपेक्षा है कि वह सिर्फ सख्त निर्णय लेने की जगह व्यावहारिक प्रबंधन पर ध्यान देगा, ताकि लोग बेचैन न हों। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। यह भी देखना होगा कि लाकडाउन के दौरान टीकाकरण की प्रक्रिया भी सही तरीके से संचालित होती रहे। शारीरिक दूरी और टीकाकरण का तालमेल स्थापित करते हुए व्यवस्थित जीवन की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी से सरकार नहीं बच सकती।

Posted By: Azmat Ali

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