रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: सीजी टीका पोर्टल शुरू होने से टीकाकरण केंद्रों पर लग रही भीड़ के नियंत्रित होने की उम्मीद जगी है। इस बीच टीकाकरण की पात्रता के लिए नियम और व्यवस्था पर गौर करने की जरूरत है। यह प्रदेश में हर व्यक्ति को एक-दूसरे से अलग कर रही है। उम्र और आर्थिक स्थिति के साथ अब संस्थागत स्थिति भी टीकाकरण के मानदंडों में शामिल है।

यह हालात 18 से 45 वर्ष तक के लोगों के लिए टीकाकरण की शुरुआत होने के साथ बने हैं। एक तरफ तो पर्याप्त मात्रा में टीका नहीं है, दूसरी तरफ समाज के विभिन्न वर्गों को अलग-अलग खाचों में बांट दिया गया है। अंत्योदय और बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्ड वालों को जागरूक करने में व्यवस्था विफल रही है, जिसके कारण उनके लिए निर्धारित टीके का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

दूसरी तरफ एपीएल (गरीबी रेखा के ऊपर) कार्डधारकों के टीकाकरण केंद्रों पर टीके की कमी के कारण ताला लटका दिया गया है। सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण के लिए फ्रंटलाइन वर्कर्स की जो सूची जारी की है, उसमें बैंक कर्मचारी से लेकर केंद्रीय शिक्षण संस्थान तक के कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया है।

दूसरी तरफ राज्य के सरकारी कर्मचारी, राज्य से संबंधित व अर्द्धशासकीय संस्थाओं के कर्मचारी, अंत्योदय और बीपीएल राशनकार्ड धारी, भोजन परोसने और सब्जी बेचने वाले, बसों और ट्रकों के ड्राइवर व कंडक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, पंचायत सचिव व कर्मचारी, गांव के कोटवार व पटेल, दिव्यांग, पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) के प्रबंधक और विक्रेता, कोरोना ड्यूटी पर लगे लोग, वकील, पत्रकार, बंदी और गंभीर बीमारियों के मरीज फ्रंटलाइन वर्कर में शामिल हैं।

इस सूची को देखने के बाद केंद्रीय संस्थानों के अधिकारियों और कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर नहीं माना जाना पक्षपातपूर्ण ही प्रतीत होता है। इस निर्णय में साफ झलक रहा है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच रिश्ते ठीक नहीं होने का खामियाजा प्रदेश में काम करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। यह विचारणीय है कि क्या हिदायतुल्ला केंद्रीय कानून विश्वविद्यालय प्रदेश की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ा रहा है। डाक विभाग, एनआइटी, आइआइटी, एमएनडीसी और रेलवे के कर्मचारियों की क्या प्रदेश की तरक्की में कोई भूमिका नहीं है?

क्या बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों का लाभ प्रदेश की जनता को नहीं मिल रहा है? इसमें संदेह नहीं है कि मामले की गंभीरता को समझने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव फ्रंटलाइन वर्कर के दायरे को और बढ़ाने में देर नहीं लगाएंगे।

यहां चिंता सरकार के उन तथाकथित सलाहकारों और शुभचिंतकों को लेकर है जो प्रदेश की तरक्की में योगदान करने वाले लोगों के बीच बंटवारा कर सरकार के प्रति नकारात्मक छवि की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश सरकार समाज में बंटवारे के जरिए बंदरबांट की सोच रखने वाले ऐसे शुभचिंतकों को जल्द से जल्द नियंत्रित करेगी। जनता को भी टीके की कमी को ध्यान में रखते हुए संयम से काम लेना होगा।

Posted By: Azmat Ali

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