रायपुर। Chhattisgarh Local Edit: छत्तीसगढ़ में माता के तीन प्रमुख मंदिर महामाया, रतनपुर, बम्लेश्वरी, डोंगरगढ़ और दंतेश्वरी, दंतेवाड़ा हैं। नवरात्र में इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था का सागर उमड़ता है, मगर इस बार राज्य में कोरोना संक्रमण के रौद्र रूप के कारण मंदिर प्रबंधकों ने श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए सार्वजनिक दर्शन और पूजा पर रोक लगा दी है।

इस नवरात्र में मंदिरों में केवल पुजारी ही पूजा करेंगे। श्रद्धालुओं को माता के दर्शन अंतर्मन से करने होंगे। प्रबंधकों का यह निर्णय उचित है, क्योंकि भीड़ के कारण कोरोना नियमावली का उल्लंघन तो होगा ही, संक्रमण के प्रसार को उर्वरता मिलेगी।

चैत्र नवरात्र में भक्त मंदिरों में दर्शन, पूजन, पाठ और ध्यान से माता को प्रसन्न् करने का प्रयास करते हैं। नाम केअनुरूप नौ दिन तक चलने वाले इस अनुष्ठान के लिए भक्त माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में मंदिर जाते हैं। इस दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण शारीरिक दूरी का पालन करवाना न तो मंदिर प्रबंधकों के लिए संभव है और न ही प्रशासन के बूते की बात है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए किस कदम से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो जाएंगी, यह कहना मुश्किल है। ऐसे मौके पर असामाजिक तत्व सक्रिय भूमिका में आ जाते हैं और आस्था केपवित्र वातावरण को दूषित कर देते हैं। वैसे भी कोरोना महामारी के समय संयम की जरूरत है। इसके लिएस्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोरोना नियमावली मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग भी जरूरी है।

मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ से इन नियमों का पालन सुनिश्चित करवाना संभव नहीं है। ऐसे में मंदिरों में सार्वजनिक आयोजन पर रोक ही सर्वोतम तरीका है। हमारे देश में महामारी के समय माता की पूजा की परंपरा रही है। नवरात्र में भी माता की ही पूजा और आराधना की जाती है। कोरोना महामारी के इस दौर में पूजा तो की जाए, पर मंदिरों या सार्वजनिक आयोजनोंकी जगह घर-घर में हो।

श्रद्धालु अपने-अपने घर में ही कलश स्थापना करें और माता के जोत जलाएं। इससे घर के सदस्यों विशेषकर बच्चोंमें सांस्कृतिक और धार्मिक चरित्र का निर्माण होगा। माता की पूजा के लिए जलाए धूप-दीप से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होगा। इनकी सुगंध में घर के वातावरण की शुद्धि होगी तो इसी गंध से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक विषाणु नष्ट हो जाएंगे।

इससे एक ओर जहां मन मस्तिष्क में पैदा हुआ कोरोना का भय मिटेगा, वहीं इससे लड़ने की क्षमता विकसित होगी। घर में ही माता की पूजा करने से परिवार के सभी सदस्यों पर कोरोना वायरस के संपर्क में आने का खतरा भी नहीं रहेगा। धार्मिक कर्मकांड परिवार के सदस्यों की सुरक्षा, सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है। अगर घर में ही ऐसे कर्मकांड किए जाएंगे तो स्वत: यह वरदान प्राप्त हो जाएगा।

Posted By: Azmat Ali

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags