रायपुर। छत्तीसगढ़ में उम्मीद के अनुरूप परिणाम नहीं आने के बाद कांग्रेस में हार पर रार मचेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान है। अब भूपेश विरोधी खेमा सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की मांग करेगा।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो देशभर में कांग्रेस का परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। ऐसे में थोड़े इंतजार के बाद भूपेश विरोधी खेमा दिल्ली में सक्रिय होगा और कम से कम प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग पर अड़ेगा। सूत्रों की मानें तो भूपेश बघेल के साथ मंत्रियों का भी परफार्मेंस काफी कमजोर रहा है। ऐसे में सरगुजा और दुर्ग संभाग से नये मंत्री बनाने की मांग उठेगी।

कांग्रेस की राजनीति के जानकारों का मानना है कि दुर्ग संभाग से मंत्री ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, स्र्द्र गुरु में से कम से कम एक मंत्री की भूपेश मंत्रिमंडल से छुट्टी होगी। इससे खाली हुए मंत्री पद को रायपुर संभाग से भरने की कवायद की जाएगी। रायपुर संभाग से वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा और अमितेश शुक्ला दावेदारों की दौड़ में हैं। संभाग से सिर्फ एक शिव डहरिया को मंत्री बनाया गया है।

ऐसे में संभाग में नेताओं के कद को संभालने के लिए शर्मा और शुक्ला में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मंत्री की दौड़ में शामिल रहे धनेंद्र साहू की महासमुंद से हार के बाद दावेदारी कमजोर हो गई है। वहीं, सरगुजा से मंत्री बनाए गए प्रेमसाय सिंह पर भी खतरे की घंटी लटकती नजर आ रही है।

यहां से विधायक अमरजीत भगत मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। ऐसे में भगत का गुट प्रेमसाय को हटाने के लिए लाबिंग तेज करेगा। प्रेमसाय को स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का करीबी माना जा रहा है। ऐसे में सिंहदेव विरोधी खेमे का भगत को समर्थन मिलने की उम्मीद की जा रही है।

महंत ने दी प्रतिक्रिया

उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत ने हार को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी सारे परिणामों की समीक्षा करेगा।

Posted By: Hemant Upadhyay