पराग मिश्रा, रायपुर। Chhattisgarh Market: प्रोटीन का अच्छा श्रोत और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने वाला अंडा इन दिनों संकट में है। होटल, रेस्त्रां, हॉस्टल और रेहड़ी आदि बंद होने से अंडे की संस्थागत खपत लगभग शून्य है। इसके चलते पोल्ट्री फार्म में अंडे का उत्पादन 40 फीसद तक कम हो गया है, लेकिन घरेलू मांग बढ़ने से कुछ राहत मिली है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर घरेलू मांग नहीं बढ़ती तो उत्पादन 50 से 60 फीसद तक कम हो गया होता। मांग कम होने से अंडे के दाम भी कम हुए हैं। छह महीने पहले छह स्र्पये में मिलने वाला अंडा आज फुटकर में 4.50 में मिल रहा है। दो महीने पहले तो यह 3.20 में बिका है।

कोरोना के कारण बाजारों पर बुरा असर पड़ा है, लेकिन अंडे का कारोबार कुछ ज्यादा ही नुकसान में चला गया। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिहाज से अंडे को अच्छा भोज्य पदार्थ माना जाता है। यह प्रोटीन का अच्छा श्रोत भी है। ताकत का पर्याय माना जाने वाला अंडा डिमांड कम होने से कमजोर पड़ गया।

लॉकडाउन के चलते सभी होटल, रेस्त्रां, हॉस्टल, रोड किनारे ठेला लगाकर अंडे बेचने वालों को प्रतिबंधित कर दिया गया। नतीजतन अंडे की डिमांड गिर गई। इन दिनों अंडे का उत्पादन केवल 60 फीसद ही हो रहा है। ऐसा खपत घटने के कारण हुआ।

बताया जा रहा है कि अभी तो अंडे की डिमांड में काफी सुधार हो गया है, लेकिन इस साल फरवरी-मार्च में तो पोल्ट्री कारोबार ही 70 फीसद तक गिर गया था। एक्सपर्ट बताते हैं कि अंडा बाजार में सुधार की वजह घरेलू मांग में बढ़ोत्तरी है। क्योंकि अंडे को इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाला माना जाता है।

फरवरी-मार्च में चिल्हर में अंडा 3.20 रुपये प्रति नग तक बिक रहा था। अंडे के साथ ही पूरे पोल्ट्री कारोबार में जबरदस्त गिरावट आई है। बायलर, चिकन की की डिमांड 70 फीसद कम हो गई है। कीमतों में गिरावट के बाद भी खरीदार गायब है।

अंडे के व्यापार में तीन चेन

अंडे को किसान से बाजार तक लाने में तीन स्तरीय होते हैं। किसान, हॉकर और दुकानदार। मांग कम होने से किसान इन दिनों 3 स्र्पया प्रति नग अंडा बेच रहे हैं। इसमें हॉकर अपना 25 से 50 पैसे कमीशन जोड़ लेता है। इसके बाद दुकानदार एक से डेढ़ स्र्पये कमीशन लेता है।

इन दिनों अंडा थोक में 345 रुपये सैकड़ा और चिल्हर में 4.50 रुपये प्रति नग के हिसाब से बिक रहा है, जबकि पिछले साल मई माह में थोक में ही अंडा 450 रुपये सैकड़ा बिक रहा था। इस प्रकार पिछले साल की तुलना में अंडे की कीमतों में 20 फीसद से अधिक की गिरावट आ गई है, लेकिन फरवरी-मार्च की तुलना में दाम बढ़े हैं।

60 फीसद हो रहा उत्पादन

डिमांड कम होने के कारण अभी 60 फीसद ही अंडे का उत्पादन हो रहा है। हालांकि घरेलू मांग बढ़ने से बाजार कुछ संभला है। अगर घरेलू मांग नहीं बढ़ती तो उत्पादन 50 से 60 फीसद तक नीचे चला जाता। - गौतम घोष, प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन

Posted By: Himanshu Sharma

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