रायपुर। राजधानी रायपुर समेत जिले में साल दर साल लगातार दुष्कर्म, छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। राह चलते स्कूली छात्राओं, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के साथ ही शादी का झांसा देकर दुष्कर्म की घटनाएं हर रोज सामने आ रही हैं। छेड़छाड़ की घटना को रोकने के लिए महिला सेल की टीम स्कूलों के आसपास अभियान चलाकर मजनुओं को लगातार पकड़ रही है, वहीं स्कूलों में चेतना कार्यक्रम के जरिए आइयूसीएडब्ल्यू द्वारा छात्राओं को छे़ड़छाड़, घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, हमला, लैंगिंग अपराध, पास्को एक्ट के साथ साइबर अपराध की जानकारी देकर इससे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं। बावजूद इसके घटनाएं थम नहीं रही हैं।

पुलिस के आकंड़ों पर गौर करें तो जिले में वर्ष 2017 में दुष्कर्म के 218, वर्ष 2018 में 222 और वर्ष 2019(नवंबर महीने तक) 210 केस दर्ज किए जा चुके हैं। इसी तरह यौन उत्पीड़न और शीलभंग के केस भी बढ़े हैं। वर्ष 2017 में 27, 2018 में 34 और 2019 में 48 यौन उत्पीड़न के केस दर्ज हुए हैं, जबकि शीलभंग की क्रमशः 214, 189 और 188 केस दर्ज हो चुके हैं।

डीजी की फटकार का हुआ असर

छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी ने राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर पिछलों दिनों सभी रेंज के आइजी, जिलों के एसपी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद पुलिस महकमे में गहमागहमी का माहौल है।

डीजीपी के कड़क तेवर का असर 24 घंटे के भीतर ही राजधानी में दिखाई दिया। गुरुवार और शुक्रवार को मजनू और मवालियों के खिलाफ पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाकर दो सौ से अधिक संदिग्धों को पकड़ा। पकड़े गए कई नाबालिगों को फटकार लगाकर सख्त हिदायत देकर छोड़ा गया।

कार्रवाई होने से बढ़ा महिलाओं का विश्वास

महिलाओं के साथ बढ़ती छेड़खानी घटनाओं को लेकर रायपुर एसएसपी आरिफ शेख का कहना है कि यह बहुत ही दुखद बात है कि शहर में महिलाओं के साथ छेड़खानी की वारदातें बढ़ी हैं, लेकिन इसके साथ ही अपराधियों पर हो रही लगातार करवाई के कारण महिलाओं का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है।

इसीलिए महिलाएं अब पहले से ज्यादा सतर्क और आत्मरक्षक हो गई हैं। पहले पुलिस और महिलाओं के बीच दूरी इतनी ज्यादा थी कि दुष्कर्म, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं हो जाने के बाद भी कई मामले सामने नही आ पाते थे, लेकिन अब जिस तरह से महिलाएं छोटी सी छोटी बात पर एक्शन ले रही हैं। इसकी वजह पुलिस पर उनका विश्वास बढ़ना है। यही वजह है कि पुलिस थानों में महिलाओं की शिकायतों की संख्या बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ में निर्भया फंड का सिर्फ 43 फीसद इस्तेमाल

राज्य ब्यूरो महिला सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आवंटित निर्भया फंड के कम इस्तेमाल पर सियासी घमासान छिड़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति हैरान करने वाली है। छत्तीसगढ़ ने 43 फीसद महिला सुरक्षा पर खर्च किया है, वहीं उत्तराखंड और मिजोरम ने कुल बजट का 50 फीसद और नगालैंड ने 39 फीसद धन खर्च किया है।

हरियाणा बजट का सिर्फ 32 फीसद हिस्सा इस्तेमाल कर पांचवें स्थान पर है। हालत यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर निर्भया फंड का सिर्फ 11 फीसद इस्तेमाल हो सका है। छत्तीसगढ़ को 2026.17 लाख रुपए फंड जारी हुए, जिसमें से 905.94 लाख रुपये खर्च किए गए।

यह है निर्भया फंड

दिल्ली में फिजियोथेरेपिस्ट की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या से पूरे देश में मचे बवाल के बाद महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में निर्भया कोष की शुरुआत की थी। इसके बाद हर साल एक-एक हजार करोड़ रुपये इस कोष में डाले जाते रहे हैं। निर्भया फंड के लिए आवंटित धन का मात्र एक फीसद खर्च होने के बाद वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय की जगह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्भया फंड के लिए नोडल एजेंसी बना दिया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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