रायपुर, नईदुनिया, राज्य ब्यूरो। छत्तीसगढ़ की पूरी सियासत इन दिनों एक जोगी की जाति में उलझी हुई है। ये जोगी हैं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी। छत्तीसगढ़ की उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति ने अमित जोगी को आदिवासी मानने से इन्कार करते हुए उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। इसे आधार बनाते हुए गौरेला-पेंड्रा- मरवाही के कलेक्टर ने मरवाही विधानसभा सीट से अमित का नामांकन निरस्त कर दिया है। हालांकि जोगी परिवार के जाति को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है।

1986 में कलेक्टरी छोड़ने से पहले तक अजीत जोगी की जाति को लेकर कोई विवाद नहीं था, लेकिन जैसे ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा जाति का विवाद शुरू इस वर्ष 29 मई को उनके निधन तक खत्म नहीं हुआ। अब भी मामला हाई कोर्ट में है। अब यही जाति का मुद्दा उनके पुत्र और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी के लिए भी सिर दर्द बन रहा है। जाति प्रमाण पत्र को आधार बनाकर अमित को मरवाही विधानसभा सीट पर उप चुनाव के मैदान से बाहर कर दिया गया है।

राज्य की उच्च स्तरीय अमित जोगी और उनकी धर्मपत्नी ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया, जिसके आधार पर चुनाव आयोग ने मरवाही विधानसभा के चुनाव में दोनों के नामांकन पत्र को रद्द कर दिया। और उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य साबित कर दिया गया। शनिवार को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला मुख्यालय में अमित जोगी के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति की सुनवाई की। छानबीन समिति ने अमित जोगी को आदिवासी नहीं माना है। इस आधार पर मरवाही विधानसभा चुनाव की उम्मीद्वारी से अमित का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया है।

जनता कांग्रेस की प्रत्याशी विधायक ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र 15 तारीख को जिला छानबीन समिति द्वारा निलंबित कर दिया गया था,जिसके बाद भी उन्होंने नामांकन भरा शनिवार को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला मुख्यालय में ऋचा जोगी के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति की सुनवाई की। छानबीन समिति ने ऋचा जोगी के जाति प्रमाण पत्र निलंबित कर राज्य समिति को आगे जांच के लिए भेजा है, तब तक उनका प्रमाण पत्र का प्रभाव नहीं रहेगा, इस आधार पर मरवाही विधानसभा चुनाव की उम्मीद्वारी से ऋचा जोगी का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि जनता कांग्रेस अध्यक्ष अमित जोगी और उनकी धर्मपत्नी ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने का आधार-

1 - जिला स्तरीय छान-बीन समिति के द्वारा जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को तीन बार नोटिस देकर वहां से एवं सुनवाई के लिए बुलाया गया था जिसमें अमित जोगी उपस्थित नहीं हुए।

2 - जिला छानबीन समिति ने प्रकरण को राज्यस्तरीय समिति के समक्ष भेजा और अमित जोगी को राज्यस्तरीय समिति ने नोटिस भेजा लेकिन अमित जोगी सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुए। जिला स्तरीय छानबीन समिति ने पाया कि अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया था और उस निरस्तीकरण के आधार पर अमित जोगी के कंवर जाति होने के दावे को छानबीन समिति ने निरस्त कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी इस प्रकरण में स्टे नहीं दिया था जिससे स्पष्ट था कि जनता कांग्रेस अध्यक्ष अमित जोगी कंवर जाति के आदिवासी नहीं है।

3 - भारत के सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद की धारा 341 जो कि अनुसूचित जाति और 342 जो कि अनुसूचित जनजाति के अधिकारों प्रदान करने के लिए होता है जिसके आधार पर देश और राज्य में वर्ष 1950 के दौरान संविधान में व्यवस्था के आधार पर अति पिछड़ी जातियों को नौकरी में लाभ मिलता है और निर्वाचन व्यवस्था में भी इसका लाभ देश की अति पिछड़ी जाति को प्राप्त होता है।

4 - लोकतंत्र में अगर किसी व्यक्ति के पास आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र नहीं है या जिसके पास फर्जी जाति प्रमाण पत्र है वह आरक्षित सीट पर कैसे चुनाव लड़ सकता है पिता के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया था और माननीय हाईकोर्ट द्वारा उसमें स्टे भी नहीं दिया गया था इस आधार पर जनता कांग्रेस अध्यक्ष अमित जोगी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किया गया एवं अमित जोगी और मरवाही उपचुनाव में दावेदारी कर रही ऋचा जोगी के जाति प्रमाण पत्र को भी छानबीन समिति ने निरस्त किया और उसी आधार पर उनका दावेदारी को चुनाव आयोग ने निरस्त किया गया। ऋचा जोगी के द्वारा 11 जमीन की खरीदी बिक्री में अपने जाति का उल्लेख नहीं किया गया है जबकि आदिवासी समाज द्वारा बेचे जाने वाले जमीन को आदिवासी ही खरीद और बेच सकता है। ऋचा जोगी अपने आप को गोढ़ी जाति का बता रही थी जबकि मुंगेली जिले में गोढ़ी जाति निवासरत नहीं है।

अमित के समर्थन में आई भाजपा

प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मरवाही विधानसभा उपचुनाव में जनता कांग्रेस के उम्मीदवार अमित जोगी का नामांकन पत्र निरस्त कराने में कांग्रेस की भूमिका को अलोकतांत्रिक व राजनीतिक दुराग्रह का परिचायक बताया है। कौशिक ने कहा कि अपने संकीर्ण राजनीतिक नज़रिये के दायरे में क़ैद कांग्रेस का स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं में कोई विश्वास नहीं है और जनादेश को हड़पने वह किसी भी हद तक जाकर विपक्ष का मुक़ाबला करने से मुंह चुराने के जतन में लगी है। कौशिक ने कहा कि पहले जकांछ उम्मीदवार ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलंबित किया जाना और बाद में आपत्ति करके जाति के मुद्दे पर जकांछ के ही एक और उम्मीदवार अमित जोगी का नामांकन निरस्त कराना लोकतंत्र पर कुठाराघात है।

कौशिक ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोटने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। स्थानीय निकायों के चुनाव में जनता के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन करके कांग्रेस चोर दरवाजे से सत्ता हासिल करने के हथकंडे आजमा चुकी है और अब अपनी सरकार के नाकारापन से शर्मसार होकर जनता के सामने विपक्ष से मुक़ाबिल होने भयभीत होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जोगी जब कांग्रेस में होते हैं तो वे आदिवासी रहते हैं लेकिन कांग्रेस से बाहर जाते ही आदिवासी नही रह जाते हैं। अब कांग्रेस पार्टी को बताना होगा कि इस तरह की दोहरी राजनीति कर वह जनता को कब तक ठगती रहेगी?

अमित का शायरना जवाब

मरवाही चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अमित और उनकी पत्‍नी ऋचा की जाति का विवाद गरमाने लगा था। पहले ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलंबित करने की सूचना आई। इस पर अमित ने कहा कि जिला जाति सत्यापन समिति ने नामांकन भरने के आख़री दिन मेरी धर्मपत्नी डाक्‍टर ऋचा जोगी का प्रमाण पत्र निलंबित कर दिया। ऐसे किसी आदेश की जानकारी हमें न तो डाक से और न ही ईमेल से भेजी गयी है, क्योंकि उन्हें मालूम है उनका बिना गुण-दोष का आदेश न्यायालय में एक सेकंड भी नहीं टिकेगा,इसलिए जानबूझकर आंख-मिचौली खेली जा रही है। अमित जोगी ने सीधे सीएम बघेल को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ये पब्लिक है, ये सब जानती है। आप खुद ही से अकेले कुश्ती लड़ते रहेंगे तो कोई नहीं जीतेगा। सब आप पर हंसेंगे और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा कि छत्तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री हसी के पात्र बन जाएं।

शनिवार को जब खुद अमित जोगी का नामांकन निरस्‍त किया गया तो उन्‍होंने कहा कि कल रातों रात उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने मेरा प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। इसकी खबर मुझे छोड़ बाक़ी सबको थी। मैंने उसे पढ़ने के लिए समय मांगा, वो भी नहीं दिया। इसके बाद अमित जोगी ने शायरना अंदाज में सरकार पर हमला बोला कहा- कातिल ही मुनसिफ है, क्या मेरे हक में फैसला देगा। इसके बाद उन्‍होंने हबीब जालिब की कुछ लाइनें ट्वीट की। लिखा- दीप जिस का महल्लात ही में जले चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले वो जो साए में हर मस्लहत के पले ऐसे दस्तूर को सुब्ह-ए-बे-नूर को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता मैं भी ख़ाइफ़ नहीं तख़्ता-ए-दार से मैं भी मंसूर हूं कह दो अग़्यार से क्यूं डराते हो ज़िंदां की दीवार से ज़ुल्म की बात को जहल की रात को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता

Posted By: Prashant Pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020