रायपुर। हसदेव अरण्य में पेड़ो की कटाई मामले में राजनीतिक खींचातानी के बाद अब 15 से अधिक जन संगठन इसके विरोध में एकजुट हो गए हैं। गुरुवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने कहा कि आदिवासियों के हक का हनन किया जा रहा है।

ग्रामसभा के झूठे प्रस्ताव लेकर मानव जाति का विनाश किया जा रहा है। बता दें कि देश के 15 राज्यों से विभिन्न जन आंदोलनकारियों ने बुधवार 29 जून को सरगुजा जिले के ग्राम हरिहरपुर धरना स्थल पर पहुँचकर हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान की प्रक्रियाओं और स्थानीय समुदाय से पूरी समस्या के बारे में जानने के बाद खनन के खिलाफ चल रहे सतत आंदोलन को अपने संघर्ष की ओर से समर्थन दिया।

मेधा पाटकर ने कहा कि हम चाहते है कि हसदेव अरण्य हो बचाया जाय क्योकि ये 1700 वर्ग किमी का क्षेत्र जहा आज आदिवासी पीढीयो से बसे हुए है। और जहा हरा अच्छादन खड़ा है को बचाना देश और दुनिया के मानव जाति को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। हसदेव अरण्य क्षेत्र मे रहने वाले हर गांव के ग्रामसभा के असल प्रस्ताव को बदलकर झूठे प्रस्ताव लाना हमे मंजूर नहीं है।

पेसा कानून और वनाधिकार संरक्षण कानून का हनन

उन्होंने आगे कहा कि पेसा कानून और वनाधिकार संरक्षण कानून जो कांग्रेस के नेतृत्व मे यूपीए सरकार ने लाया था उनका ही उल्लंघन किया जा रहा है। ये प्रदेश के कांग्रेस सरकार से अपेक्षा नही थी। आज हसदेव अरण्य को लेकर ग्राम सभा के फर्जी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा रहा है, उसे रद्द कर सही प्रस्ताव को लेकर वन को बचाना जीवन को बचाने जैसा है। राहुल गांधी ने जो अस्वासन आदिवासियों को दिए थे उसे प्रदेश की कांग्रेस सरकार झूठलाए नहीं।

राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

मेधा पाटकर सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा, पांचवी अनुसूची के तहत ऐसे क्षेत्रों के प्रशासन के लिए राज्यपाल को तमाम अधिकार दिए गए हैं। उन्हें उन अधिकारों का प्रयोग कर ग्रामीणों को न्याय दिलाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से भी इस विषय पर विसृत चर्चा करने की इक्छा जताई है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए किसान नेता पूर्व विधायक डा. सुनीलम ने कहा कि मोदी सरकार एक तरफ काले कृषि कानून लाकर अडानी अम्बानी को पूरा कृषि क्षेत्र सुपुर्द करना चाहती है दूसरी ओर कोयला खनन में MDO जैसे अनुबंधों के द्वारा कोल इंडिया को ख़त्म करके अडानी के हाथ में कोयला खनन पर एकाधिकार दे रही है। सत्ता को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस तरह देश के किसानों ने मजबूर किया है काले कानूनों को वापस लेने के लिए उसी तरह अडानी के मुनाफे के लिए हसदेव को उजाड़ने की कोशिशों से राज्य को पीछे हटना पड़ेगा।

मुद्दे को केन्द्रीय नेतृत्व तक ले जाने की कोशिश

विभिन्न राज्यों से आये प्रतिनिधि मण्डल में सर्वहारा जन आन्दोलन से उल्का महाजन, लोक संघर्ष मोर्चा से प्रतिभा शिंदे, ओडिशा जिंदाबाद संगठन से त्रिलोचन पूजी, मध्य प्रदेश किसान संघर्ष समिति से डा.आराधना भार्गव, लोकाधिकार संगठन दिल्ली से धर्मेन्द्र, जनजागरण शक्ति संगठन से सोहिनी, बिहार, अवध पीपल फोरम दे गुफरान भाई ने कहा कि जरूरत पड़ी तो हम हसदेव के मुद्दे को कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व तक भी ले जाने की कोशिश करेंगे।

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