Magha Purnima 2020 : रायपुर। हिंदू संवत्सर के माघ महीने की पूर्णिमा तिथि पर आज पवित्र नदियों में स्नान करने का सिलसिला चल रहा है। इस क्रम में त्रिवेणी संगम राजिम में मेला लगा है। वहीं पुरा नगरी सिरपुर में एक दिवसीय सिरपुर महोत्सव का आयोजन चल रहा है। जहंा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से समंा बंधा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज 45 किलोमीटर दूर राजिम में होने वाले प्रदेश के सबसे बड़े पुन्न्ी मेला घूमने का आनंद लेने हजारों लोग आएंगे। भाजपा के शासनकाल में कुछ वर्षों से राजिम मेला अर्ध्य कुंभ के नाम से देशभर में प्रसिद्ध हो चुका है। पिछले साल कांग्रेस शासित राज्य सरकार ने राजिम अर्ध्य कुंभ का नाम पुन्न्ी मेला कर दिया है, हालांकि यही नाम पुरातन काल में प्रचलित था।

महाशिवरात्रि तक चलेगा मेला

इस साल नौ फरवरी माघ पूर्णिमा से शुरू होकर यह मेला महाशिवरात्रि 21 फरवरी तक चलेगा। पवित्र त्रिवेणी संगम के तट पर लगने वाले मेला की तैयारियां पूरी कर ली गई है। नदी पर रेत की अस्थायी सड़कों का निर्माण, स्नान के लिए कुण्ड बनाया गया है। पेयजल, अस्थायी शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, 50 दाल-भात सेंटरों की व्यवस्था भी की गई है। खासकर मेला क्षेत्र में कपड़ा एवं कागज के थैलों का ही उपयोग किए जाने का आदेश दिया गया है।

रंगारंग कार्यक्रम

राजिम में मुख्य मंच पर प्रतिदिन शाम 6 से 10 बजे तक छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक एवं लोक परंपराओं पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें नाचा, पंडवानी, रामधुनी, सुआ नृत्य, भोजली, डंडा नृत्य, राउत नाचा, गेड़ी आकर्षण के केन्द्र होंगे। साथ ही इस बार छत्तीसगढ़ी पारंपरिक खेलकूद भी आकर्षण के केन्द्र होंगे। भौंरा, बाटी, बिल्लस, फुगड़ी, तिरी-पासा, लंगड़ी, गोंटा, पित्तुल, फल्ली और नून जैसे खेलों की खनक गुजेंगी। दोपहर 3 से 4 बजे तक खेलकूद का प्रदर्शन किया जाएगा।

राजिम का मेला इसलिए है खास

गरियाबंद जिले के राजिम में तीन नदियों का संगम है इसलिए इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। तीन नदियां महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम स्थल है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का भव्य मंदिर है। 2001 से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था, 2005 में इसे राजिम अर्ध्य कुंभ नाम दिया गया। पिछले साल 2019 से राजिम पुन्न्ी मेला महोत्सव नाम से मनाया जा रहा है।

राजीव लोचन के दर्शन बिना जगन्न्ाथपुरी की यात्रा अधूरी

ग्रामीणों में मान्यता है कि भगवान जगन्न्ाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नही मानी जाती जब तक भगवान राजीव लोचन तथा कुलेश्वरनाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है। जो संगम स्थल पर विराजमान है। मेला की शुरुआत कल्पवास से होती है पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते है। पंचकोशी यात्रा में श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते हैं। 101 किलोमीटर की यात्रा के समापन के बाद माघ पूर्णिमा से मेला का आगाज होता है, जो महाशिवरात्रि तक चलता है।

इधर, दक्षिण कोशल अर्थात प्राचीन छत्तीसगढ़ की राजधानी रहे पुरा नगरी सिरपुर में आज माघ पूर्णिमा पर एक दिवसीय सिरपुर महोत्सव का आयोजन किया गया है। रविवार की सुबह 10.30 बजे से सोमवार की अल सुबह पांच बजे तक विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा। स्थानीय कलाकारों को महोत्सव में विशेष मंच दिया गया है। कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, लोकनृत्य, नाटक युग की पुकार और नवजीवन का मंचन होगा, कत्थक नृत्य, लोकगीत की प्रस्तुति होगी। रात दो बजे से अलसुबह पांच बजे तक भुंइया के गोठ छत्तीसगढ़ी नाचा की प्रस्तुति होगी।

Posted By: Anandram Sahu

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