रायपुर। नईदुनिया, राज्य ब्यूरो। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी में पदोन्नति और तबादला को लेकर विवाद बढ़ने के आसार हैं। कंपनी में करीब सप्ताहभर पहले बड़ी संख्या में इंजीनियरों की पदोन्नति की गई है। लेकिन पदोन्नत हुए जूनियर (जेई) और असिस्टेंट इंजीनियरों (एई) का अब तक पदस्थाना आदेश जारी नहीं हुआ है। उर, कंपनी कर्मचारी पदोन्नति नहीं होने के कारण बेचैन हैं। कर्मचारी नेता सौदेबाजी और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं।

बिजली अफसरों के अनुसार वितरण कंपनी में जूनियर से लेकर वरिष्ठ रैंक तक के इंजीनियरों को पदोन्नत किया गया है। इनमें 36 जेई और 52 एई भी शामिल हैं। जेई और एई को छोड़कर बाकी रैंक के ज्यादार इंजीनियरों की पदोन्नति के साथ नवीन पदस्थापना आदेश जारी कर दिया गया है।

इंजीनियरों के अनुसार नियमानुसार नवीन पदस्थाना स्थान पर ज्वाइनिंग के दिनांक से पदोन्नति की गणना की जाती है। इसी वजह से पदोन्न्त होने वाले जेई और एई रैंक इंजीनियर नई पदस्थाना को लेकर बेचैन हैं, लेकिन सप्ताहभर बाद भी आदेश जारी नहीं दलालों के सक्रिय होने समेत कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है।

पत्रोपधि अभियंता संघ के वरिष्ठ नेता एनआर छीपा ने बताया कि अब तक की परंपरा यही रही है कि पदोन्नति के साथ ही पदस्थाना आदेश जारी किया जाता है। इस बार पदोन्नति तो कर दी गई है, लेकिन नई पदस्थाना नहीं दी गई है। इससे पूरे मामला संदिग्ध लग रहा है और भ्रष्टाचार की बू आ रही है।

केवल अधिकारियों की पदोन्नति

इधर, केवल अधिकारियों को थोक पदोन्नत करने और कर्मचारियों की उपेक्षा किए जाने पर कर्मचारियों ने तीव्र विरोध प्रगट किया है। बिजली कर्मचारी महासंघ के अनुसार चुनावों के पहले अकिारियों के पदों का रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़ी संख्या में कार्यपालक निदेशक से लेकर कनिष्ठ यंत्री के नए पदों का सृजन कर पदोन्नति दी गई है। वहीं कर्मचारी पदों का रिस्ट्रक्चरिंग करने की महासंघ की मांग पर सहमति के बावजूद सेटअप स्वीकृति नहीं किया गया।

महासंघ के महामंत्री हरीश चौहान और संगठन मंत्री अरूण देवांगन ने बताया है कि महासंघ की मांग पर दुर्ग, जगदलपुर के क्षेत्रीय स्तर के पदों पर पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं लेकिन मुख्य अभियंता कार्यालय से अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।

Posted By: Hemant Upadhyay