रायपुर। राजधानी में प्रदूषण की जांच करने वालों की इन दिनों बल्ले-बल्ले है। प्रदूषण सेंटर प्रमाण पत्र देने के नाम पर खूब कमाई कर रहे हैं। प्रदूषण की जांच किए बगैर ही मोटी रकम लेकर आसानी से सर्टिफिकेट उपलब्ध करा रहे हैं। यह खेल रावाभाठा आरटीओ कार्यालय के फिटनेस स्थल पर ही चल रहा है। फिटनेस कराने के लिए आने वाली गाड़ियों को प्रदूषण सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। प्रदूषण की जांच करने वाले सिर्फ वाहन चालक को सामने खड़ा कर फोटो खींचकर प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी कर दे रहे हैं।

प्रदूषण सर्टिफिकेट मिलने के बाद आरटीओ के अधिकारी भी फिटनेस जारी कर दे रहे हैं। इससे जहरीला धुआं उगलने वाली गाड़ियों को भी आसानी फिटनेस जारी हो रहा है। आरटीओ के अधिकारी का कहना है कि प्रदूषण सेंटरों के खिलाफ शिकायत मिली है, इस पर जांच चल रही है।

ज्ञात हो कि राजधानी रायपुर में करीब 85 प्रदूषण सेंटर गाड़ियों के प्रदूषण की जांच कर उनको सर्टिफिकेट प्रदान कर रहे हैं। विभाग प्रदूषण सर्टिफिकेट प्रदान करने की अनुमति तो प्रदान कर देता है, लेकिन इनके ऊपर किसी की मॉनिटरिंग नहीं रहती है। इसलिए इस तरह का खेल चल रहा है।

नईदुनिया की पड़ताल में जो तथ्य सामने आए, वह काफी चौंकाने वाले हैं। नईदुनिया ने आरटीओ कार्यालय के फिटनेस स्थल की पड़ताल की तो वहां पर पॉल्यूशन जांच करने वाले वाहन चालक को वाहन के सामने खड़ी करके फोटो खींचकर प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे। इसके एवज में वह बड़ी गाड़ी का 150 रुपये और छोटी गाड़ी का 80 रुपये ले रहे हैं। प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी करने वालों के ऊपर विभाग की मॉनिटरिंग नहीं रहती है, इसलिए इस तरह के खेल चल रहा है।

ऐसे होनी है प्रदूषण की जांच

प्रदेश में गाड़ियों के प्रदूषण की जांच को गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है, जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की जांच करता है। इसे कंप्यूटर को भेजता है, जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस, प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से मापदंड के अंदर प्रदूषण निकल रहा है तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। यदि मानकों से अधिक प्रदूषण निकल रहा है तो सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा।

क्या है पीयूसी

पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) इसकी जांच को पीयूसी टेस्ट कहते हैं। इस जांच के बाद ही किसी गाड़ी को पीयूसी सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह सर्टिफिकेट एक निश्चित समय को मान्य होता है। गाड़ियों के लिए समय सीमा एक साल की होती है।

- वाहनों की प्रदूषण जांच करने के बाद पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। शिकायत मिली है कि बिना गाड़ी आए ही पॉल्यूशन सेंटर जारी किया जा रहा है। इसकी जांच चल रही है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।- शैलाभ साहू, आरटीओ रायपुर

Posted By: Sandeep Chourey

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