रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की प्रांतीय बैठक में कर्मचारी नेताओं ने तीखे तेवर दिखाए हैं। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा की अध्यक्षत में स्थानीय माध्यमिक शिक्षा मंडल परिसर में यह बैठक हुई। इसमें वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में समस्या ज्यादा है और जटिल है। फेडरेशन की प्रमुख मांगों पर मुख्य सचिव से आने वाले दिनों में चर्चा की जाएगी। लोगों का भ्रम तोड़ने मुख्य सचिव के साथ फोटोशूट कराने के बजाए अब मांगों पर ही चर्चा होगी।

संयोजक वर्मा ने कर्मचारी संघों के संशय को दूर करते हुए कहा कि कई बार तात्कालिक निर्णय लेने पड़ते हैं जिसके लिए कुछ यूनियन को शामिल कर कोर कमेटी का गठन किया गया है। कोर कमेटी अपना निर्णय फेडरेशन को प्रस्तुत करेगी।

उन्होंने बताया कोर्ट और शासन के निर्णयों की समीक्षा के लिए समितियों का भी गठन किया गया है। वर्मा ने कहा मध्यप्रदेश की तरह यहां भी संघों को स्थाई मान्यता दिया जाना चाहिए।

फेडरेशन के प्रांतीय सचिव राजेश चटर्जी ने कहा कि सरकार की गद्दी में कौन बैठा है यह फेडरेशन का मुद्दा नहीं है बल्कि समयमान वेतनमान पर शासन से स्पष्ट बात करनी होगी। स्वास्थ्य एवं बहुउद्देश्यीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पंकज पांडेय फर्म व सोसायटी पर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग मान्यता के नाम पर संघों की भावनाओं से खेल रही है।

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री विजय कुमार झा ने फर्म व सोसायटी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अनेक सवाल खड़े किए। अजय तिवारी ने केंद्र समान महंगाई भत्ता, चार स्तरीय पदोन्न्त वेतनमान संबंधित मांग को लेकर राजधानी में भोजन अवकाश के समय प्रदर्शन किया जाना चाहिए।

अजाक्स संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ लक्ष्मण भारती ने कहा कि संघों के बीच आपस में वैमनस्यता को दूर कर एक हो जाना चाहिए । एसआर धृतलहरे ने कहा कि सरकार को अपने घोषणा पत्र में किये वादों को जल्द पूरा करने कदम उठाने चाहिए।

अपाक्स संघ के सत्येंद्र देवांगन मंत्रालय स्तरीय भत्ता पद्धति को जिला स्तरीय में भी लागू करने और लिपिकों की वेतन विसंगतियों को रेखांकित करते हुए फेडरेशन का ध्यानाकर्षण किया। डिप्लोमा इंजीनियर संघ की ओर से बोलते हुए पीके नामदेव ने आंदोलन की कार्ययोजना का समर्थन करते हुए कहा कि आंदोलन को सफल बनाने में जिला की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

कर्मचारी कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष बी पी शर्मा ने कहा कि हर साल मान्यता देने की परंपरा में भ्रष्टाचार की बू आती है । उन्होंने कहा कि जब समस्त दस्तावेज में पदाधिकारी तीन साल तक के लिये चुने जाते हैं तो मान्यता एक साल के लिए क्यों। रंजना ठाकुर ने वेतन विसंगति और पदोन्नति संबंधित मांगों को रखते हुए फेडरेशन की मांग पत्र में जोड़ने की मांग की।

Posted By: Sandeep Chourey

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