रायपुर। Raipur News : देश में एक ओर जहां आजादी की लड़ाई के लिए संघर्ष जारी था, वहीं दूसरी ओर उसी वक्त शिक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ प्रांत में उच्च शिक्षा की नींव गढ़ी जा रही थी। अनेक संघर्षों और उतार चढ़ाव के बीच अंतत: प्रांत में शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय की नींव तैयार हुई। 16 जुलाई 1938 को बनी यह महाविद्यालय सालों से शान के साथ खड़ा है। यह एक ऐसा महाविद्यालय है जहां की फीस काफी कम है। शायद यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर विद्यार्थी यहां पढ़ाई करने को प्राथमिकता देते हैं।

छत्तीसगढ़ में यदि पहले महाविद्यालय का जब भी जिक्र होता है, तो हर कोई छत्तीसगढ़ महाविद्यालय का नाम जरूर लेता है। इतिहासकारों की मानें, तो अंग्रेजों के शासन काल में उच्च शिक्षा हासिल करना काफी मुश्किल था। उस दौर में महाविद्यालय की स्थापना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं थी।

ऐसे में एडवोकेट जे. योगानंदम ने महाविद्यालय की स्थापना के लिए एक समिति बनाई, जिसका नाम छत्तीसगढ़ शिक्षण समिति रखा गया। इसी समिति की बदौलत 16 जुलाई 1938 को महाविद्यालय का निर्माण किया गया। पहले यह महाविद्यालय बांस की टट्टों से पुराना हेडक्वार्टर के पास संचालित होता था, लेकिन नवंबर 1957 में देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन ने महाविद्यालय का उद्धाटन किया था।

तीन हजार से अधिक विद्यार्थी करते हैं पढ़ाई

महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अमिताभ बैनर्जी बताते हैं कि क्षेत्र का सबसे पुराना महाविद्यालय है। यहां बड़ी तीन हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इनमें ज्यादातर विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इस महाविद्यालय में एससी, एसटी के विद्यार्थी बड़ी संख्या में अध्ययन कर रहे हैं। शासकीय महाविद्यालय होने की वजह से यहां की फीस काफी कम है।

इन विषयों की होती है पढ़ाई

महाविद्यालय में आर्ट, साइंस, कार्मस, पीजीडीसीए और ला विषयों के पाठ्यक्रम संचालित है। वहीं चार विषयों में शोध केंद्र और 18 विषयों में पीजी पाठ्यक्रम संचालित है। इसके साथ ही महाविद्यालय में कुछ ऐसे भी विषय हैं, जिनकी पढ़ाई दूसरे महाविद्यालय में न के बराबर होती है।

Posted By: Shashank.bajpai

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