रायपुर । छत्तीसगढ़ में दो अक्टूबर से प्रदेशव्यापी सुपोषण अभियान शुरू किया जा रहा है। तीन वर्ष में राज्य को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के सभी हितग्राहियों का सरकार ग्राम पंचायत स्तर पर डाटाबेस तैयार करेगी। इसमें उनके नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ स्वास्थ्य में आ रहे बदलाव की पूरी जानकारी रहेगी।

इसकी तैयारी को लेकर मंगलवार को मुख्य सचिव सुनील कुमार कुजूर ने मंत्रालय में अफसरांे की बैठक ली। मुख्य सचिव ने अभियान के तहत लाभ दिए जाने वाले हितग्राहियों की विस्तृत जानकारी रखने के निर्देश दिए है। अभियान शुरू होने के निश्चित समय-सीमा के बाद उनके स्वास्थ्य में हो रहे परिवर्तन की भी जानकारी ग्राम स्तर पर रखी जाए।

मुख्य सचिव ने अभियान के तहत लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों की जानकारी, अभियान के दौरान दिए जाने वाले पौष्टिक भोजन की सारणी, विभिन्न् विभागों द्वारा संचालित की जाने वाली गतिविधियों और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी और अभियान की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए है। बैठक में सभी विभागों के आला अफसर मौजूद थे।

इस वजह से चलाना पड़ रहा सुपोषण अभियान

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में पांच वर्ष के कम आयु के लगभग 37.7 फीसद बच्चे कुपोषित है। देश में कुपोषण का आंकड़ा 35.7 है। इसी तरह 15 से 49 वर्ष की 47 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 53.1 फीसद है।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों का करें उपयोग

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा है कि अभियान के तहत दिए जाने वाले पौष्टिक भोजन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थो का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए है। उन्होंने कुपोषित और एनीमिया पीड़ितों के लिए अलग-अलग मीनू बनाने के निर्देश दिए हैं।