रायपुर। Child Adoption: निसंतान दंपत्ति के लिए बच्चा गोद लेना इतना आसान तो नहीं, पर अब कठिन भी नहीं है। इसके लिए मात्र आपको सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। यदि आप रायपुर में रहते हैं तो यहां पर मातृछाया में पल रहे अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए आप आवेदन कर सकते हैं। साल 2015 से 2019 तक रायपुर से दूसरे राज्यों में 34 बच्चों को गोद लिया गया है। प्रदेश में ही करीब 35 बच्चों को गोद दिया गया है। इनमें 60 फीसद बालिकाएं है। बालकों की अपेक्षा बालिकाओं को गोद लेने के लिए ज्यादा आवेदन आ रहे हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आ रहा है। अभी रायपुर के मातृछाया में करीब 18 बच्चे पल रहे हैं।

गोद लेने के लिए यह दस्तावेज जरूरी

0 दंपती में से किसी एक के पास पैन कार्ड होना चाहिए।

0 फोटोग्राफ, ईमेल आइडी, मोबाइल नंबर।

0 आयकर रिटर्न या आय प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र।

0 अगर तलाक हो गया है तो तलाक का प्रमाण पत्र, पति या

पत्नी में किसी मृत्यु हो गई है तो उसका प्रमाण पत्र।

0 विवाह नहीं किया है अकेले रहते हैं तो कोई बात नहीं।

0 कोई संक्रामक रोग या गंभीर रोग नहीं, इसका प्रमाण पत्र देना होगा।

आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें-

विदेशियों ने भी गोद लिए बच्चे

रायपुर के सेवा भारती मातृछाया से पिछले दो साल के भीतर पांच बच्चों को विदेशियों ने गोद लेकर संतान सुख हासिल किया है। अमेरिका में सबसे अधिक चार और एक न्यूजीलैंड के दंपती ने बच्चों को गोद लिया है। विदेशों से अभी भी 10 से अधिक आवेदन कतार पर हैं। यह स्थिति तब है जब विदेशियों को बच्चा गोद लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। गौरतलब है कि पहले किसी अनाथ बच्चे को गोद लेना बहुत आसान था। महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी के यहां आवेदन के बाद जिला जज की अनुमति से बच्चा मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बच्चा उसी व्यक्ति को गोद दिया जा रहा है, जो बेहतर ढंग से देखभाल और लालन पालन कर सके। बच्चे को गोद लेने के लिए आठ से नौ महीने का समय लग रहा है।

अब कठिन हो गए हैं नियम

विदेशियों को भारत में बच्चा गोद लेने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रक्रिया भले ही सामान्य लगती हो, लेकिन व्यवहारिक तौर पर बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। प्रवासी भारतीयों सहित विदेशियों को अपने देश में पंजीकृत एडॉप्शन एजेंसी के माध्यम से ही अपील दर्ज करनी होती है, जिन्हें भारत में भी काम करने की इजाजत हो। भारत में ऐसे मामलों की कागजी कार्रवाई सरकार द्वारा पंजीकृत एजेंसियां ही कर सकती हैं। अब वे देश की किसी भी अदालत में सीधे तौर पर विदेशी नागरिक गोद लेने का आवेदन नहीं कर सकते।

उच्चायोग में अटेस्टेड करना होता है।

पहले होगी पुलिसिया जांच

गोद लेने वाले परिवारों की स्थिति का आकलन, पुलिस रिपोर्ट, परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति, आय और स्वास्थ्य सर्टिफिकेट आदि देने होते हैं। इन दस्तावेजों को भारतीय दूतावास या उच्चायोग में अटेस्टेड किया जाता है।

प्रदेश में दो तरह की योजनाएं

दत्तक ग्रहण योजना : इस योजना के तहत शून्य से छह साल तक के बच्चों को गोद लिया जाता है।

फोस्टर केयर योजना: इस योजना के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को गोद लेते हैं। लेकिन प्रदेश में दंपती फोस्टर केयर में कम दिलचस्पी ले रहे हैं, गोद लेना ज्यादा पसंद करते हैं।

एक बच्चे के लिए दस आवेदन

अभी मातृछाया में 18 बच्चे पल रहे हैं । इन्हें गोद लेने के लिए अभी 200 आवेदन हैं। गौरतलब है कि किसी अनाथ बच्चे को गोद लेना चाहते हैं तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के छह से आठ माह इंतजार के बाद ही आप बच्चा गोद ले पाएंगे। अब सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी की वेबसाइट पर आवेदन के समय ईमेल आइडी, मोबाइल नंबर, पैनकार्ड समेत कई प्रमाण पत्र देने होंगे। योजना के तहत आवेदन के बाद छह बच्चों की फोटो, नाम आदि विवरण आवेदनकर्ता को उसकी ई-मेल आइडी पर भेजी जाएगी।

बच्चों को गोद लेने के लिए सैकड़ों आवेदन लंबित है, किसी को जल्दी बच्चा मिल जाता है किसी को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है 2 साल की अवधि भी पूरी हो जाती है। प्रक्रिया पूरी होते ही दंपत्ति को बच्चा गोद दिया जा रहा है।

- अशोक कुमार पांडेय, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी

Posted By: Himanshu Sharma

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