रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य और चिकित्सा की व्यवस्था बेहतर नहीं है। प्रदेश भर के अस्पतालों में रिक्त चिकित्सकों समेत पैरा मेडिकल स्टाफ तथा अन्य पदों की कमी किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश के बस्तर जैसे वनांचल के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों में बच्चों को डॉक्टरी सिखाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। व्यावसायिक कोर्स हेल्थ केयर के विद्यार्थियों को छोटी-मोटी बीमारी, चोट या हादसे के समय मरीजों को प्राथमिक उपचार कैसे दें, आदि की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके लिए राजधानी के प्रमुख स्कूलों में हेल्थ केयर के लिए जो प्रयोगशाला बनाई गई है, जिसके जरिए बच्चे आधे डॉक्टर बन रहे हैं। स्कूलों में प्रयोग के लिए मानव डमी भेजी है। राजधानी के प्रोफेसर जेएन पाण्डेय स्कूल में यहां मानव डमी रखकर बीएससी नर्सिंग और चिकित्सा से जुड़े विभिन्न कोर्सेस करने वाले विशेषज्ञों बच्चों को हेल्थ से जुड़ी प्रमुख प्राथमिक उपचार से अवगत करा रहे हैं।

समग्र शिक्षा योजना की पहल

स्कूलों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित वोकेशनल कोर्स योजना के तहत ऐसा हो पाया है। दरअसल प्रदेश के 546 स्कूलों में वोकेशनल कोर्स लागू किया गया है। इनमें टेलीकम्यूनिकेशन, बैंकिंग फाइनेंस, एनिमेशन और मल्टीमीडिया ट्रेड, आइटी, हेल्थ केयर, एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, रिटेल, ब्यूटी वेलनेस और इलेक्ट्रानिक्स एंड हार्डवेयर कोर्स शुरू हुए हैं। फिलहाल हेल्थकेयर को लेकर छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह है। वोकेशनल कोर्स के तहत यह कोई सतही पढ़ाई नहीं है। स्कूल के प्राचार्य एमआर सावंत ने बताया कि न सिर्फ स्कूल में , बल्कि बच्चों को आसपास के निजी अस्पतालों में भी इंटर्नशिप कराई जा रही है। इस विषय में थ्योरी में 30 अंक और बाकी प्रैक्टिकल में 70 अंक का वेटेज दिया जा रहा है।

पांच लाख रुपये में बनाई प्रयोगशाला

बता दें कि इन कोर्सेस के लिए हर स्कूल में एक ट्रेड के लिए 3 से 5 लाख रुपये फंड देकर लैब स्थापित किया गया है । जेएन पाण्डेय स्कूल की प्रशिक्षिका संगीता कोसले के मुताबिक इनके जरिए मेडिकल इमरजेंसी जैसे हार्टअटैक के वक्त क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इन सब बातों की जानकारी बच्चों को दी जा रही है। इसी तरह सिर चकराने से लड़खड़ाकर गिर जाना है और बेहोश हो जाता है। कई बार अचानक कोई सदमा लगने से भी कई लोग बेहोश हो जाते हैं, ऐसे समय में ये बच्चे प्राथमिक उपचार के लिए काबिल हो रहे हैं।

वर्जन

राज्य सरकार की योजना है कि बच्चों को वोकेशनल पढ़ाकर उन्हें रोजगार के लिए काबिल बनाया जाए। हेल्थकेयर भी उन्हीं योजनाओं में से एक योजना है। - एस प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

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Posted By: Nai Dunia News Network

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