रायपुर। आल एचबीएन इनवेस्टर ट्रस्ट के ट्रस्टी संतोष निर्मलकर, गणेश नरेडी एवं जेडी देवांगन ने गुरुवार को प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने एचबीएन के निवेशकों का पैसा वापिस करने का फैसला दिया है।

एचबीएन के निवेशकों द्वारा प्रस्तुत याचिका का निराकरण करते हुए एचबीएन की समस्त संपत्तियां कुर्क कर पैसा लौटाने को कहा गया है। वार्ताकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में निवेशकों का नकद 1100 करोड़ और जमीन में निवेश करने वालों के 83 करोड़ रुपये फंसे हैं।

वार्ताकारों के अनुसार एचबीएन कंपनी की संपत्तियां वर्तमान में सेबी के पास अटैच है। सेबी उक्त निर्णय के परिपालन में सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन ले रही है। इनकम टैक्स विभाग ने भी कंपनी की संपत्ति को अटैच किया है।

15 कंपनियों ने ग्रामीणों को लूटा

अन्य कंपनियों में सांईं प्रसाद प्रापर्टीज लिमिटेड, विनायक होम्स एवं रियल इस्टेट लिमिटेड, सांईं प्रकाश प्रॉपर्टीज लिमिटेड, श्रीराम रियल इस्टेट, सुविधा फॉर्मिंग, सनसाइन हाईटेक प्रालि, जेएसवी डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड, जी लाइफ, बीएन गोल्ड रियल इस्टेट लि., अल केमिस्ट टाउनशिप, एचवीएन रियल इस्टेट, एचबीएन फुल लिमिटेड, सनसाइन इंफ्रा बिल्ड कार्पोरेशन लिमिटेड, यश ड्रीम रियल इस्टेट एवं अनमोल एग्रो हर्बल सहित 15 कंपनियों ने चिटफंड के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोक लुभावन वादों के साथ निवेशकों को ठगा।

सेबी की पहल का इंतजार है

एचबीएन के निवेशकों की तरफ से याचिका दायर करने वाले दिल्ली के अधिवक्ता संयम गोयल ने पत्रकारवार्ता में बताया कि सेबी और इनकम टैक्स के पास कंपनी की राजसात संपत्ति को बेचकर निवेशकों का पैसा अधिकतम दो वर्ष की अवधि में वापस होने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि आम तौर पर कंपनी द्वारा किए जा रहे व्यापार में निवेश किया जाता है, जबकि एचबीएन एवं उसकी सहयोगी कंपनियों ने केवल निवेशकों से पैसे लिए, उसका व्यापार नहीं हुआ। इसलिए कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करेगी तो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निवेशकों के पक्ष में निर्णय दिए जाने की संभावना है। पत्रकारवार्ता में प्रदेश के निवेशक सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे।