रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विकास और निर्माण शुल्क माफ करने की घोषणा का महापौर एजाज ढेबर ने स्वागत करते हुए आभार जताया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए महापौर ने कहा कि इस फैसले से गोलबाजार के 579 दुकानों के नियमितिकरण का रास्ता साफ हो गया है। व्यापारियों को 19.52 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। महापौर ने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की 31वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल ने ऐतिहासिक गोलबाजार मालिकाना हक योजना के तहत प्रस्तावित विकास प्रभार की राशि माफ करने के साथ निर्मित संरचना को नियमितीकरण योजना में लिए जाने की घोषणा कर व्यापारियों को बड़ी सौगात दी है। इससे व्यापारियों को करीब 25 करोड़ का लाभ मिलेगा।

महापौर ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना के रूप में एक लाख 53305 वर्गफीट भूमि में फैले हुए ऐतिहासिक गोलबाजार के सभी किरायेदार व्यापारियों को दुकानों का मालिकाना हक देने के साथ शहर के सबसे स्मार्ट बाजार बनाकर विकसित करने की योजना जल्द ही शुरू होगी। महापौर ने कहा कि अगले एक सप्ताह में गोलबाजार के दुकानदारों का किरायेदार से सीधे मालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अगले एक माह में व्यापारियों के नाम की रजिस्ट्री का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री को भेंट की भागवत गीता

गोलबाजार व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री को मुलाकात के दौरान भागवत गीता की प्रति भेंट की। भागवत गीता को रिमोट के माध्यम से अंग्रेजी, हिन्दी और संस्कृत भाषाओं में स्पीकर के माध्यम से सुनी और पढ़ी जा सकती है। मुलाकात के दौरान महासंघ के अध्यक्ष धनराज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष अजय देवांगन, पूर्व अध्यक्ष जोगेंद्र नागवानी आदि व्यापारी शामिल थे।

नईदुनिया ने उठाया था मुद्दा

गोलबाजार में विकास एवं निर्माण शुल्क को लेकर नईदुनिया ने प्रमुखता से मुद्दा उठाया था। इस संबंध में लगातार खबरें प्रकाशित की गई। राज्य सरकार के साथ जनप्रतिनिधियों एवं आला अधिकारियों से सवाल-जवाब किए गए। कारोबारियों की मांगों को इससे ताकत मिली। आखिरकार, राज्य सरकार ने मांगों को मानते हुए कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।

इसलिए विकास शुल्क का विरोध

गोलबाजार में 579 दुकानें हैं। निगम ने सभी दुकानदारों पर करीब एक हजार रुपए, निर्मित क्षेत्रफल पर प्रति वर्गफीट की दर से विकास शुल्क लगाया था। शुल्क की वजह से यदि किसी की 100 वर्गफीट की दुकान है, तो उनसे एक लाख रुपए लिया जाना था। वर्तमान में कई व्यापारियों ने दो और तीन मंजिला दुकानें बना ली हैं। प्रत्येक फ्लोर में यदि 100 वर्गफीट है और दुकान तीन फ्लोर की तो 300 वर्गफीट निर्मित क्षेत्रफल का विकास शुल्क तीन लाख तक देना पड़ता। यह शुल्क कोई भी व्यापारी देने को तैयार नही था।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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