रायपुर। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में चार अक्टूबर को धमतरी के कंडेल नगर से शुरू हुई गांधी विचार पद यात्रा का गुरूवार को राजधानी रायपुर के गांधी मैदान में एक सभा के साथ समापन हुआ। इस पद यात्रा में शामिल हजारों कांग्रेसी और गांधीवादी सात दिनों की पदयात्रा कर कंडेल से रायपुर के गांधी मैदान पहुंचे। यहां एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम भूपेश बघेल ने गांधी जी के विचारों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जोड़ा।

उन्होंने बताया कि गांधी जी के विचारों से छत्तीसगढ़ी समाज किस तरह प्रभावित हुआ और कंडेल सत्याग्रह का प्रभाव किस तरह पूरे देश में फैला। छत्तीसगढ़ी भाषा में दिए गए अपने भाषण में सीएम भूपेश ने भाजपा और आरएसएस पर भी हमले किए। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस का राष्ट्रवाद गांधी से नहीं, हिटलर और मुसोलिनी से प्रभावित है। प्रस्तुत हैं छत्तीसगढ़ी भाषा में सीएम भूपेश के भाषण के प्रमुख अंश-

गांधी जी जानत रहीस कि अंग्रेज मन के कमजोरी पइसा हे, एकर बर गांधी जी कहीस कि हमन ला टेक्स नहीं देना है, असहयोग करना है। जहां सबसे पहिले असहयोग आंदोलन होईस ओ कंडेल है। बापू ए आंदोलन में शामिल होए बर तीन दिन बर छत्तीसगढ़ आइन। छत्तीसगढ़ के धरती पर गुरू घासीदास सत्य के रद्दा में चले के जो संदेश दे हे रहीन, ओही संदेश गांधी जी हा इहां देहीस।

आज कल राष्ट्रवाद के, धर्म के बहुत चर्चा होवत हे। जे मन आजादी के आंदोलन में भाग नहीं ले हे हैं, ओ मन ला सर्टीफिकेट बांटे जात हे। एकर मन के राष्ट्रवाद खोखला है। भाजपा के और आरएसएस के राष्ट्रवाद मुसोलिनी और हिटलर ले प्रभावित हे। ए विनास के राष्ट्रवाद हे। ए मन के राष्ट्रवाद बापू के अऊ हमर संत महात्मा मन के राष्ट्रवाद नी हे। वास्तर में कांग्रेस के राष्ट्रवाद हा गांधी के राष्ट्रवाद हे।

यदि गांधी ला मानथस तो इहां गोडसे के स्थान नई हे, गोडसे के निंदा करना पड़ही। भाजपा के एक नेता हा गोडसे जी कहत रहीस, गोडसे ला सम्मान देबे तो गांधी के समर्थक कभी नई बन पाबे। गोडसे के विचारधारा में चले वाला मन गांधी ला कैसे अपना सकत हें।

दुनिया के बहुत से गुलाम देश मन गांधी के विचारधारा के माध्यम से आजादी प्राप्त करीन हें। छत्तीसगढ़ के पुरातन नाम दक्षिण कोशल हे। ए हा राम के ननिहाल हे। हमर छत्तीसगढ़ राम के राज्य हे, गुरू घासीदास के राज्य हे, महात्मा गांधी के राज्य है। ए राज्य ला हमन ला एकर गरीमा के अनुरूप बना के रखना है।

इहां के संस्कृति अऊ संस्कार ला बचा के रखना है। गांधी के बताए रद्दा पर गांव के विकास बर छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी- नरवा-गरुआ-घुरुआ अऊ बारी के संरक्षण के मुहिम चलाए गए हे, हमन ला एला बचा के रखना हे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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