रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तीन जून को प्रदेश के कलेक्टर और एसपी से सीधा संवाद करेंगे। सीएम की कांफ्रेंस से पहले अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल है। कलेक्टर-एसपी अपने जिलों का परफार्मेंस कार्ड तैयार करा रहे हैं, तो मंत्रालय में पदस्थ आइएएस भी पीछे नहीं है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद अधिकारियों की नींद उड़ी है।

कमजोर परफार्मेंस वाले जिलों के कलेक्टर और एसपी अपनी उपलब्धियों को खोजने के लिए निचले स्तर के अधिकारियों की टीम को तैनात किया है। सरगुजा, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के अधिकारियों ने तो नरवा-घुरवा की रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन मुख्यमंत्री के सवालों के जवाब के लिए अफसर अभी से तैयारी शुरू कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस सरकार के रणनीतिकारों को हिला कर रख दिया है। मंत्रालय से लेकर जिलों में पदस्थ अफसरों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि पांच महीने में आखिर जनता का मूड कैसे बदल गया। सरकार अब पूरे सिस्टम में आमूलचूल बदलाव करने के मूड में है।

सोमवार को प्रदेश में आचार संहिता हट जाएगी। इसके बाद कलेक्टर, एसपी के ट्रांसफर तीन जून को कलेक्टर, एसपी कांफ्रेंस में पारफारमेंस देखने के बाद किया जाएगा। मंत्रालय में भी कुछ विभागों के सेक्रेटरी बदले जाएंगे। उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो भाजपा सरकार में लूपलाइन में रहे अधिकारियों को भूपेश सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। लेकिन परफार्मेंस के मोर्चे पर ये अधिकारी पूरी तरह से फेल हो गये हैं।

ऐसे में संकेत मिल रहा है कि डॉ रमन सरकार में बेहतर परफार्मेंस वाले अफसरों को एक बार फिर मुख्य धारा में लाया जा सकता है। मंत्रालय के आला अधिकारियों ने बताया कि सरकार को भी अपना परफार्मेंस देना है। छह महीने बाद नगरीय निकाय चुनाव है। ऐसे में बेहतर काम करने वाले अफसरों को मुख्यधारा में लाना सरकार के लिए मजबूरी भी है।


रिटायर हो रहे आईएफएस संविदा के जुगाड़ में

भारतीय वन सेवा के तीन अफसर मई में रिटायर हो जाएंगे। पीसीसीएफ स्तर के आईएफएस केसी यादव, कौशलेंद्र सिंह और एके द्विवेदी 30 मई को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि ये अधिकारी संविदा नियुक्ति की तैयारी में जुट गये हैं। नान मामले में ईओडब्ल्यू की जांच के सामना कर रहे कौशलेंद्र सिंह को छोड़ दिया जाए, तो बाकी दोनों की छवि बेहतर है। लेकिन भूपेश सरकार संविदा को लेकर अलग ही स्र्ख रखती है। ऐसे में इन दोनों की वापसी की गुजाइश कम ही नजर आ रही है।

Posted By: Hemant Upadhyay