रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछली सरकार ने आनन फानन में चुनाव के पहले टेंडर जारी किए थे। चुनावी फायदा लेने के लिए, लेकिन आचार संहिता लगने के बाद कई काम शुरू नहीं हो सके। नई सरकार की अपनी प्राथमिकता है।

विकास कार्य ठप करने के विपक्षी सदस्यों के आरोपों का सदन में जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि केवल राज्य बजट से पोषित निर्माण कार्यों के लिए ही हमने कहा है कि वित्त की दोबारा स्वीकृति से काम शुरू होगा। परीक्षण करने के बाद ही स्वीकृति जारी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को क्या करना है यह हम तय करेंगे। जवाब से असंतुष्ट भाजपा के सदस्य ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

विधानसभा में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिश ने यह सवाल उठाया। कहा कि राज्य बजट से स्वीकृत निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि जिन कामों को निरस्त किया गया, उनमें से कई महत्वपूर्ण काम ऐसे हैं, जिन्हें बस्तर विकास प्राधिकरण, सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक में स्वीकृत किये गए थे।

उनके लिए बजट में प्रावधान किया जा चुका था। वहीं विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार के आदेश को गलत बताते हुए कहा कि प्रदेश में विकास के काम ठप्प पड़ गए हैं। विकास कार्य अवरुद्ध हो गया है। सरकार का आदेश गलत है।

उन्होंने बताया कि रायपुर नगर निगम क्षेत्र में ही पीडब्ल्यूडी के काम नहीं हो रहे हैं। कौशिक ने कहा कि लोकसभा की आचार संहिता के पहले निर्णय लिया जाना चाहिए।

इस पर कांग्रेसी विधायक सत्यनारायण शर्मा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जब काम स्वीकृत किये गए थे तब जमकर कमीशनखोरी की गई थी। इसके बाद अमरजीत भगत ने पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर को लेकर टिप्पणी कर दी। इस पर भाजपा के सदस्य भड़क गए।

कोई समय सीमा नहीं

एक पूरक प्रश्न के जवाब में सीएम ने बताया कि करीब 8493 काम रोके गए हैं। उन्होंने कहा कि जिसका प्रस्ताव आ रहा है, उसका परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कामों को दोबारा स्वीकृत करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।

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