रायपुर। कन्हर बांध के निर्माण के चलते प्रभावितों के पुनर्वास का मामला शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में जोरशोर से उठा। कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह और डॉ. प्रीतम राम ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए यह मामला उठाया। जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि परियोजना से रामानुजगंज के कुछ गांव आंशिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक प्रभावितों का पुनर्वास नहीं हो जाता, उत्तरप्रदेश को नाला क्लोजर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि निर्माणाधीन कन्हर बांध से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभावित गांव झारा, त्रिसूली, सेमरवा, कुशपुर सहित कई गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा स्थानीय प्रशासन व विभाग से सहयोग की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हजारों परिवार डूब क्षेत्र से प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान स्थिति में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, व्यवस्थापन के लिए प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसके जवाब में जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि अभी बांध नहीं बन रहा है। डुबान का सर्वे चल रहा है। जब तक प्रभावितों को मुआवजा राशि नहीं मिल जाती, पुनर्वास नहीं हो जाता तब तक उत्तरप्रदेश सरकार को नाला क्लोजर की अनुमति नहीं जा सकती। मंत्री ने लोधीडांड एनीकट निर्माण में अनियमितता के मामले में कहा तीन अधिकारी-कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन्होंने इस मामले में तत्कालीन एसडीओ को भी निलंबित करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि खुटपाली व्यपवर्तन योजना के तहत शीर्ष व नहर कार्यों के अलग-अलग टेंडर किए गए थे। अल्प समय में अत्यधिक वर्षा के कारण नहर का लगभग 66 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसका सुधार कार्य ठेकेदार की अमानत राशि व सुरक्षा निधि से कराया जाएगा। इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी तत्कालीन कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी व उपअभियंता को निलंबित कर दिया गया है।

निर्माण में गड़बड़ी, इंजीनियर सस्पेंड

कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि महानदी पर लगभग चार करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन लोधीडांड एनीकट वर्ष 2013 के वर्षाकाल में बह गया। सूर्यानाला में निर्मित सूर्या व्यपवर्तन योजना का शीर्ष कार्य भी बह गया। इसी प्रकार कन्हर नदी पर निर्माणाधीन खुटपाली योजना की मुख्य नहर भी बह गई। जल संसाधन मंत्री ने लोधीडांड एनीकट के निर्माण में अनियमितता पर जल संसाधन विभाग के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी को सस्पेंड करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि खुटपाली व्यपवर्तन योजना के तहत शीर्ष व नहर कार्यों के अलग-अलग टेंडर किए गए थे। अल्प समय में अत्यधिक वर्षा के कारण नहर का लगभग 66 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसका सुधार कार्य ठेकेदार की अमानत राशि व सुरक्षा निधि से कराया जाएगा। इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी तत्कालीन कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी व उपअभियंता को निलंबित कर दिया गया है।

पोलावरम पर अमित के अशासकीय संकल्प को विधानसभा की मंजूरी

पोलावरम बांध की अधिकतम ऊंचाई स्तर 150 फीट तक रखने संबंधी विधायक अमित जोगी काअशासकीय संकल्प छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से स्वीकृत हो गया है।

अमित ने यह संकल्प पेश किया था- यह सदन केंद्र सरकार से अनुरोध करता है कि इंदिरा सागर अंतरराज्यीय परियोजना अंतर्गत आंध्रप्रदेश की गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन पोलावरम बांध की ऊंचाई से छत्तीसगढ़ को किसी तरह का नुकसान न हो इसलिए बांध का अधिकतम डुबान स्तर 150 फीट रखा जाए। अशासकीय संकल्प पर चर्चा के दौरान अमित ने कहा कि पोलावरम बांध बनने से छत्तीसगढ़ के बस्तर के कई गांव डूब जाएंगे। यह बात आंध्रप्रदेश की सरकार भी अपनी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बता रही है, लेकिन हमारी सरकार को इस बात की चिंता नहीं है। राज्य सरकार ने बांध बनने से होने वाले प्रभाव का सर्वे भी नहीं कराया है। बांध बनने से बस्तर के कई गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, वहां रहने वाली आदिवासी जाति कोया और दोरला का तो नामोनिशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार भी इसके विरोध में है। अपने भाषण के दौरान जोगी ने कुछ राष्ट्रीय नेताओं के नामों का उल्लेख किया और कहा कि ये लोग बांध के समर्थन में हैं। संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर और कांग्रेस सदस्य भूपेश बघेल ने इस बात पर आपत्ति की कि जो लोग सदन में नहीं हैं उनका नाम न लिया जाए। आसंदी ने व्यवस्था देकर उन राष्ट्रीय नेताओं के नाम विलोपित करवा दिए। कांग्रेस सदस्य कवासी लखमा, अमरजीत भगत, रामदयाल उईके, राजेंद्र राय ने भी संकल्प प्रस्ताव का समर्थन किया।

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