रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

इंद्रदेवता से बड़ी अरज थी कि जमकर बरसो। अब नहीं बरसोगे तो सावन के बाद भादो भी बीत जाएगा, उसके बाद तो आप चाहकर भी प्रकृति के विपरीत मेहरबानी नहीं कर सकते। दुआ कुबुल हुई और बादलों ने अपना रौद्र रूप कुछ यूं दिखाया कि गुरुᆬवार-शुक्रवार की रात से शुरू हुई बारिश, शुक्रवार की सुबह तक जारी रही। अब तो हम आप यह भी नहीं कह सकते कि मन्नतें पूरी नहीं होतीं, दुआ में दम नहीं होता। मगर हम हैं तो इंसान ही। जब पानी नहीं बरसता तो कहते हैं कि भगवान रूठा है, जब बरसता है तो कहते हैं कि हे भगवान, बस करो। ऊपर वाला नाराज है...। मगर ऐसा है नहीं। दिल को दिलासा देने के लिए यह अच्छा विचार है, दरअसल हमारी तैयारियां ही नहीं रहतीं। बरसात में हर साल रायपुर की 10-12 कॉलोनियां डूबती हैं। इसके पीछे वजह सिर्फ यही है कि ड्रेनेज सिस्टम नहीं है।

'नईदुनिया' टीम कुछ ही घंटों की बरसात के बाद जलभराव वाले क्षेत्रों में पहुंची। जल विहार कॉलोनी, आरडीए कॉलोनी इंद्रप्रस्थ, विधायक विश्रामगृह, अयोध्या नगर। लोगों के घरों के आर-पार पानी जा रहा था। रात भर इन्होंने जागकर काटी। अब सोचिए, जब नाले-नालियों का पानी आपके घर के अंदर घुसे तो क्या हाल होगा। 19 साल बाद भी रायपुर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं बन पाया है। इससे ज्यादा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।

जयस्तंभ में भी भरा पानी- लालगंगा शॉपिंग मॉल के सामने से लेकर जयस्तंभ तक हर साल पानी भरता है। इस बार भी भरा। सड़क पर गाड़ियां रेंगती रहीं। मोतीबाग में सालेम स्कूल के सामने पानी भरा रहा, बच्चे कैंपस के बाहर नहीं निकल पाए। कई स्कूलों का यही हाल रहा। शहर के कई मुख्य मार्गों में सड़क दिखाई ही नहीं दी।

निगम अमला पहुंचा मोटर पंप लेकर- शहर की जिन बस्तियों में पानी भरने की सूचना निगम तक पहुंची, अमला मोटर पंप लेकर पहुंचा। जल विहार कॉलोनी में तीन पंपों से पानी निकाला गया। इसके अलावा कई नाले-नालियों में फंसे कचरे को हटाया गया, तब जाकर पानी उतरा।

19 साल में भी नहीं बना ड्रेनेज सिस्टम- अविभाजित मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ साल 2000 में अस्तित्व में आया। रायपुर को इसकी राजधानी बनाया गया। रायपुर का चौतरफा विकास हुआ। बड़े-बड़े होटल, मॉल, रेल से लेकर परिवहन सेवा, उद्योग में भारी-भरकम विकास हुआ। मगर काम नहीं हुआ तो ड्रेनेज सिस्टम को लेकर। शहर में बरसात के पानी के अलावा नाले-नालियों के पानी की निकासी तक का कोई सिस्टम नहीं है। 1980 में एक सिस्टम बना था, लेकिन पीएचई-निगम की लड़ाई में यह सिस्टम बैठ गया। हर साल शहर की दर्जन भर से अधिक कॉलोनियां डूबती हैं। पुराने सिस्टम की मरम्मत करने के लिए महापौर प्रमोद दुबे ने सरकार से 50 करोड़ मांगे, जो नहीं मिले। जबकि जानकारों का कहना है कि नया ड्रेनेज सिस्टम बनाने में 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो पुराने शहर में आसान नहीं। प्रदेश ड्रेनेज सिस्टम को लेकर बिलासपुर में हुए काम का भुक्तभोगी है।

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शहर का हाल का प्रमाण देती तस्वीरें-

तस्वीर 1-

स्थान- जल विहार कॉलोनी

समय- शुक्रवार, दोपहर 12.10 बजे

समस्या- 50 से अधिक घरों में घुसा पानी, 100 घरों तक आवा-जाही बंद

- शहर की पॉश कॉलोनियों में एक है जल विहार कॉलोनी। तेलीबांधा मरीन ड्राइव के ठीक पीछे की कॉलोनी। यहां स्लम बस्ती भी है और करोड़पतियों के बंगले भी। जब भी तेज बारिश होती है तो यह कॉलोनी डूब जाती है। गुरुवार-शुक्रवार की रात से जमकर बारिश हुई। शुक्रवार की सुबह 11 बजे जाकर पानी खुला। 'नईदुनिया' टीम मौके पर पहुंची। यहां 100 से अधिक घरों के सामने पानी था, 50 घरों में नाले-नालियों का गंदा पानी आर-पार हो रहा था। उनमें एक घर है एक्साइज डिपार्मेंट से सेवानिवृत्त हुए प्रभात सिंह का। उनके घर के आर-पार पानी था। स्थिति यह थी कि न सिर्फ घर के सामने से, बल्कि पीछे के नाले से भी पानी घर में घुस रहा था। वे कहते हैं कि महापौर प्रमोद दुबे, पार्षद कचरू साहू समेत सभी कई बार आकर समस्या देख चुके हैं, लेकिन समाधान आज तक नहीं निकाला।

तस्वीर 2-

स्थान- जल विहार कॉलोनी

समय- शुक्रवार, दोपहर 1 बजे

समस्या- चौराहे के सारे रास्ते में घुटनों तक पानी

- इसी कॉलोनी के जल विहार चौक के हालात यह थे कि चारों तरफ पानी ही पानी था। चौराहे से निकलने वाली सभी सड़कों में घुटने तक पानी था। बी. सिक्का ने तो इसी जलभराव के चलते अपना घर तीन फीट ऊंचा बनवाया। यहीं रहने वाला 10 साल का रमन स्कूल नहीं गया, क्योंकि उसके घर में पानी भरा हुआ था। वह घंटों पानी उलीचता रहा। यहीं रहने वाले कर्नल एसके मिश्रा नाली साफ करते हुए नजर आए। पूछने पर बोले- निगम अमले का क्या दोष, वे तो आते हैं नालियां साफ करते हैं और चले जाते हैं। हम-आप हैं जो नालियों में कचरे से भरा पॉलीथिन बैग फेंकते हैं और यह जाम हो जाती हैं। कर्नल नाली में फंसा कचरा निकाल रहे थे, ताकि पानी की निकासी हो सके।

तस्वीर 3-

स्थान- विधायक विश्रामगृह, राजेंद्र नगर

समय- शुक्रवार, दोपहर 2 बजे

समस्या- विधायकों की कॉलोनी हर साल डूबती है

- कुछ साल पहले विधायकों के लिए 36 मॉल के पीछे बंगले आवंटित हुए, इसके पहले ये सभी राजेंद्र नगर स्थित विधायक विश्राम कॉलोनी में ही रहते थे। तब भी कॉलोनी के ठीक सामने की सड़क पानी में दो फीट तक डूबी रहती थी, आज भी यही हाल है। पानी कॉलोनी के अंदर जा घुसा। कैंटीन में पानी भर गया। यह सारा पानी नाले-नालियों का था। विधायकों के रहते हुए समस्या दूर नहीं हुई तो अब स्थानीय लोगों को उम्मीद कम है।

तस्वीर 4-

स्थान- अयोध्या नगर

समय- शुक्रवार, दोपहर 2.30 बजे

समस्या- नाली छोटी, इसलिए नहीं निकलता पानी

- शहीद चंद्रशेखऱ वार्ड अंतर्गत आने वाले अयोध्या नगर के 400 घरों के सामने सड़कों पर पानी भरा हुआ था। निकासी की जगह नहीं है, क्योंकि नालियां बहुत छोटी हैं। पार्षद यशोदा साहू व उनके पति कमल साहू मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि कई बार समस्या की जानकारी अफसरों को दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

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कई निचली बस्तियों में बारिश का पानी भरा था, जिसे निकालने टीमें लगाई गईं थी। कुछ स्थानों पर स्थितियां ऐसी हैं कि पानी की निकासी थोड़ी मुश्किल होती है। आपने जिन क्षेत्रों के बारे में बताया है उनमें इंजीनियर्स के साथ पहुंचकर देखा जाएगा कि पानी निकासी की व्यवस्था में क्या सुधार हो सकता है।-एके हल्दर, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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