रायपुर। प्रदेश सहित रायपुर के आसपास क्षेत्रों में मानसून ब्रेक होने से किसान खरीफ फसल को लेकर चिंतित हैं। नर्सरी डाल चुके किसान बोरवेल के सहारे नर्सरी को जीवित रखने की जद्दोजहद में लगे हैं। जिन किसानों के पास नलकूप नहीं है वे कम अवधि वाली फसल लेने का मन बना रहे हैं।

धमतरी के किसान किशन साहू का कहना है कि इस वर्ष बरसात अच्छी होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन पानी की दिक्क्त के कारण नर्सरी नहीं तैयार हो पाई। अब तो सिर्फ भगवान भरोसे खेती रह गई है। यह स्थिति एक जगह की नहीं, बल्कि प्रदेश भर की है। स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को बीमा कराने की सलाह दे रहा है ताकि लागत वसूल हो जाए। ज्ञात हो कि धमतरी, अभनपुर, आरंग, झीट आदि इलाकों में बारिश बहुत कम हुई है।

रोपाई को लेकर विभाग भी चिंतित

बारिश थमने से सिर्फ रोपाई-बियासी को लेकर किसान ही चिंतित नहीं हैं, बल्कि कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। रायपुर कृषि विभाग के कृषि अधिकारी आरएल खरे का कहना है कि किसान चिंतित न हों। निर्धारित लक्ष्य पूरा होगा, साथ ही किसान सबसे पहले बीमा कराएं। यदि रोपाई या बियासी में पानी को लेकर दिक्क्त हुई तो बीमा के माध्यम से लागत निकल जाएगी। आरएल खरे की मानें तो रायपुर में लगभग 80 फीसद बोनी का कार्य पूरा हो गया है। समितियों के माध्यम से 26 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण कर दिया गया है।

मिट्टी की नमी सूख गई

अधिकांश क्षेत्रों में किसान जोताई-बोवाई नहीं कर पा रहे हैं। बोरवेल के सहारे खेती करने वाले किसान धान की नर्सरी डाल चुके हैं। कुछ जगह नर्सरी तैयार हो गई है, लेकिन बारिश के इंतजार में बैठे किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।

गिरते जल स्तर ने बढ़ाई चिंता

नया बीज लेकर फसल की तैयारी में जुटे किसान रामनिहोर अब कम अवधि की फसल लेने का मन बना रहे हैं। वे पांच एकड़ में खेती करते हैं। इस बार अच्छी बरसात होने की उम्मीद थी, लेकिन जुलाई को कुछ ही दिन रह गए हैं और खेत सूखे पड़े हैं।

निलजा गांव के किसान जीधन वर्मा लगभग 20 एकड़ में खेती करते हैं और हर वर्ष अच्छी पैदावार लेते हैं। इस वर्ष भी अच्छी फसल लेने के लिए उन्होंने खेत में बोरवेल के सहारे नर्सरी तैयार की। अब बोरवेल के लगातार गिर रहे जल स्तर ने उन्हें चिंता में डाल दिया है।