रायपुर। छत्तीसगढ़ में टिकट में कांग्रेस ऐसे उलझ गई है कि सारे चुनावी अभियान किनारे हो गए हैं। किसान, महिला, युवा, आदिवासी और अन्य वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस ने अभियानों की रूपरेखा तो तैयार कर ली, लेकिन उनमें से कुछ को शुरू किया तो ब्रेक लगा।

कुछ अभियानों का तो आगाज ही नहीं हो पाया। तीन माह से पार्टी के वरिष्ठ नेता केवल प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में व्यस्त हैं। अब प्रत्याशियों की घोषणा इतनी देर से हो रही है कि अभियानों को चलाना पार्टी के लिए मुमकिन नहीं रहेगा।

इन चुनावी अभियानों की बनी थी रूपरेखा

किसान अधिकार यात्रा

प्रदेश के 35 लाख किसानों को साधने के लिए किसान अधिकार यात्रा शुरू करनी थी। हर जिले में किसानों के बोनस, समर्थन मूल्य, खाद, मुफ्त बिजली और पानी के लिए यात्रा निकाली जानी थी। यात्रा शुरू नहीं हो पाई।

संकल्प यात्रा

झीरम कांड की याद ताजा करने के लिए पांचवीं बरसी पर झीरम घाटी से इस यात्रा की शुस्र्आत हुई थी। पहले चरण में बस्तर संभा में यात्रा निकाली। उसके बाद चार संभाग के लिए सरसरी तौर पर केवल रूपरेखा ही बन पाई।

जंगल सत्याग्रह

आदिवासी बहुल 85 ब्लॉक के मतदाताओं को साधने के लिए कांग्रेस के आदिवासी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दौरा शुरू किया था। पहले चरण का दौरा हुआ। दूसरे चरण का दौरा शुरू ही नहीं कर पाए।

महिला चौपाल

महिला वोटरों को कांग्रेस के पाले में लाने के लिए महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने संगठन की प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम को हर गांव में महिला चौपाल लगाने का निर्देश था, जिसमें महिलाओं से जुड़े मामले महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म और महंगाई जैसे जुद्दों पर चर्चा की जानी थीा। यह शुरू नहीं हुआ।

हम बदलेंगे राजनीति

पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को साधने के लिए एनएसयूआइ ने हम बदलेंगे राजनीति अभियान शुरू किया। एनएसयूआइ भी इस अभियान को गंभीरता से नहीं चला पाई।