रायपुर। पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अंतर्गत संचालित एडवांस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट में कॉर्डियक थोरोसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. केके साहू ने एक ऐसा वीडियो तैयार किया है जो मरीजों को ये याद दिलाता है कि आपके लिए रोजाना समय पर दवा लेना कितना जरूरी है। दवा न लेने पर जान जा सकती है।

पूरी तरह से हिंदी में तैयार यह वीडियो उन सभी मरीजों या फिर उनके परिजनों के मोबाइल में अपलोड भी करवाते हैं और यह कहते हैं कि इसे हफ्ते में दो बार जरूर देखें। यह सारी कवायद इसलिए क्योंकि हार्ट और नसों की कुछ सर्जरी में ब्लड (खून) को आजीवन पतला रखना होता है। इसके लिए खास दवाएं हैं जो नियमित लेनी हैं। आप चूके तो खून का थक्का बनना शुरू हो जाता है और वॉल्व चिपक जाता है और फिर मौत तय है।

अस्पताल में अकिांश मरीज आदिवासी क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों से आते हैं। इनके लिए रायपुर दिल्ली से कम दूर नहीं है। यह वजह है कि सर्जरी के बाद फॉलोअप के लिए नहीं आते। डॉक्टर के पास रिकॉर्ड तक नहीं होता कि वह जीवित है मौत हो गई अथवा किसी अन्य डॉक्टर के यहां इलाज करवा रहा है।

ऐसे में यह वीडियो मरीजों के लिए कारगर है। वे न भी आएं तो इसमें सुनकर-पढ़कर यह जान सकते हैं कि दवा कब लेनी है, कौन सी लेनी है, कैसे लेनी। 'नईदुनिया" से बातचीत में डॉ. साहू बोले- सिर्फ सफल सर्जरी कर देना डॉक्टर का मकसद नहीं होना चाहिए, उन्हें चाहिए कि वे आजीवन मरीज को अलर्ट रखें। इसी उद्देश्य से यह वीडियो बनाया है।

दूसरे डॉक्टर के लिए भी मददगार

जिस मरीज का वॉल्व रिप्लेसमेंट हुआ है, अगर उसे दूसरी कोई बीमारी हो गई जिसमें सामान्य सर्जरी या फिर चीरा लगाने की जरूरत है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को पता ही नहीं होता कि वह खून पतला होने वाली दवा ले रहा है। ऐसे में सर्जरी होने पर पूरा खून बह सकता है। यह वीडियो अगर मरीज डॉक्टर को दिखाए तो वे स्थिति समझ सकते हैं।

आखिर क्यों होती है मौत

इन मरीजों की सर्जरी के बाद दवा देकर किया जाता है खून पतला

1- वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी

2- पैरों की नसों में ब्लॉकेज सर्जरी के मरीज।

3- दिल में रिदम नहीं बनने वाले मरीजों में।

4- फेफड़ों की नसों में थक्का जम जाने के बाद हुई सर्जरी के मरीजों में।

क्या होता है आइएनआर

मरीज के खून को कितना पतला किया जाए, इसका एक अंतरराष्ट्रीय मानक है। इसे इंटरनेशनल नॉर्मलाइज्ड रेशियो (आइएनआर) कहते हैं। वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी वाले मरीज का खून 2 से 3 आइएनआर सेट किया जाता है। यह सामान्य व्यक्ति से दो से तीन गुना अकि पतला होता है।

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