रायपुर। Coroan Pandemic: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद-छत्तीसगढ़ ने प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर केवल विद्यालय एवं महाविद्यालय बंद करने के राज्य सरकार के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या कोरोना से केवल शिक्षा जगत से जुड़े लोगों को ही खतरा है? अभाविप के प्रदेश मंत्री शुभम जायसवाल ने कहा कि बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते जहां प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहे शॉपिंग मॉल, हाट-हटरी, शराब दुकानें, सरकारी कार्यक्रम एवं आयोजन आदि को रोकने के ज्यादा प्रयास होने चाहिए, वहां राज्य सरकार द्वारा इन पर कोई लगाम न लगाकर केवल विद्यालय एवं महाविद्यालय बंद करने का निर्णय लेना समझ से परे है।

इससे ऐसा प्रतीत हो कि सरकार अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह भी मानना है कि शैक्षिक वर्ष 2020-21 के लिए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन से पूर्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पाठ्यक्रम को पूरा किया जाए।

पाठ्यक्रमों के पूरा न होने की स्थिति में परीक्षाओं में यथोचित पाठ्यक्रमों की कमी भी की जाए तथा कोविड की सभी मार्गदर्शिकाओं का ध्यान रखते हुए परीक्षाओं का आयोजन किया जाए। परिषद् सरकार से यह मांग करती है कि कैम्पसों को पूरी तरह बंद करने की बजाय अलग-अलग पालियों यें क्रमबद्ध रूप से कक्षाएं चलाई जाएं और परीक्षाएं आयोजित की जाएं।

बताते चलें कि स्कूल के शिक्षकों और प्राचार्यों सहित बच्चों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से स्कूल और कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है। इसके साथ ही पहली से नौंवीं और 11वीं कक्षा की परीक्षा नहीं कराने का फैसला भी सरकार ने लिया है।

Posted By: Shashank.bajpai

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