रायपुर। Blood Donation: कोरोना संकट ने रक्तदान की राह रोक दी है। कोरोना काल में रक्तदान को लेकर लगने वाले शिविर बंद हो गए हैं। जरूरतमंद मरीजों को रक्ता नहीं मिल पा रहा है। कोरोना महामारी के कई तरह के दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उन्हीं में से एक है ब्लड बैंकों में रक्त की कमी। रक्तदान शिविर लगाकर रक्त जुटाने वाले युवा भी बेबस हैं, क्योंकि इस दौर में रक्त देने को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां व डर घर कर गए हैं। वर्तमान परिस्थितियों में कैंप लगाना भी चुनौतीपूर्ण है। स्वैच्छिक रक्तदान पूरी तरह बंद है।

खाली हैं ब्लड बैंक, गिनती के आ रहे रक्तदान करने वाले

राजधानी में आठ से ज्यादा ब्लड बैंक हैं। आलम यह है कि लगभग सभी ब्लड बैंक खाली होने की कगार पर हैं। एक ब्लड बैंक में जहां 120 यूनिट से ज्यादा ब्लड हमेशा रहता था आज हालात यह है कि सभी ब्लड ग्रुप का मिला दें तो 10 यूनिट ब्लड ही है। ऐसे में ब्लड को लेकर खतरा मडरा रहा रहा।

स्वजनों को डोनर लाने के लिए कहा जा रहा

सिटी ब्लड बैंक से मिली जानकारी के अनुसार रेयर ब्लड ग्रुप का रक्त नहीं मिल पा रहा है। रोजाना लगभग अलग-अलग ब्लड ग्रुप के लिए लोग पहुंच रहे हैं। ब्लड बैंक पूरी तरह से खाली हैं। एबी पॉजिटिव, ओ पॉजिटिव सहित अन्य रेयर ब्लड ग्रुप की काफी दिक्कत है। ऐसे में स्वजनों को डोनर लेकर आने कहा जा रहा।

पहले स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आते थे 100 से ज्यादा लोग

शहर के ब्लड बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना से पहले स्वैच्छिक रक्तदान करने के लिए 100 से ज्यादा लोग आते थे। अब गिनती के 10 से भी कम लोग पहुंच रहे। इसकी वजह से ब्लड बैंक पूरी तरह से खाली हो गए हैं।

थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों के लिए मुश्किल

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए रक्त जुटाना ज्यादा मुश्किल हो रहा है क्योंकि उन्हें नियमित अंतराल पर रक्त की आवश्यकता होती है। मार्च तक सभी को जरूरत के हिसाब से रक्त उपलब्ध हो जा रहा था। लेकिन अप्रैल में भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है।

रोजाना आ रहे जरूरतमंदों फोन

लोगों को रक्ता जुटाने में मदद कर रहीं अंजना वर्मा ने बताया कि रोजाना 15 से 20 लोगों के मैसेज फोन उनके पास ब्लड के लिए आ रहे हैं। इसमें एबी पॉजिटिव के सबसे ज्यादा आ रहे हैं। जो बेहद ही रेयर है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से ग्रुप में शेयर कर रहीं हैं लेकिन कोरोना काल में बेहद मुश्किल हो रहा है।

राजधानी के प्रमुख ब्लड बैंक

- डीकेएस अस्पताल

- आंबेडकर अस्पताल ब्लड बैंक

- सिटी ब्लड बैंक

- रेडक्रॉस ब्लड बैंक

वर्जन

पहले जहां 100 से ज्यादा यूनिट ब्लड रहता था अब हालात यह हैं कि 10 यूनिट भी ब्लड नहीं है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं की कमी आई है। अब स्वजनों को उसी ब्लड ग्रुप वाले डोनर को लेकर आने बोला जा रहा है। मांग भी काफी बढ़ गई है।

- डॉ. धर्मवीर बघेल, प्रभारी अधिकारी, ब्लड बैंक, डीकेएस अस्पताल

Posted By: Shashank.bajpai

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