रायपुर। Corruption In DEO Office News : शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति में करीब 74 लाख स्र्पये की गड़बड़ी परत-दर-परत खुलती जा रही है।

सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक जांच में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय के सहायक संचालक और बाबू से पूछताछ में पता चला है कि इस पूरे मामले में पूर्व डीईओ जीआर चंद्राकर ने आरटीई का कार्यभार संभाल रहे सेक्शन अधिकारी और बाबू से बगैर कोई नोटशीट के ही भुगतान कराया था।

मामले में डीईओ कार्यालय के एक दूसरे बाबू से भुगतान करने से पहले स्कूलों के नाम और खाता क्रमांक कंप्यूटर पर टाइप कराए गए थे। इतनी बड़ी रकम भुगतान करने के बाद इसकी नोटशीट भी विभाग के पास नहीं है। प्रारंभिक जांच रायपुर के संयुक्त संचालक एसके भारद्धाज ने की है।

उन्होंने जांच करके संचालनालय को जानकारी दी है। वहीं मामले का पर्दाफाश होने के बाद अब संदिग्ध खातों में कुछ खातेदारों को सामने लाकर उनकी ओर से यूको बैंक में रकम वापस कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। जानकारों का कहना है कि 28 जनवरी को खाते में गई रकम को करीब एक महीने तक खातेदार दबाकर बैठे रहे और अब मामला सामने आने के बाद रकम वापस कराई जा रही है।

सुलगते सवाल और लीपापोती में अफसर

एक तरफ पूरे मामले में कई सवाल सुलग रहे हैं और दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और विभागीय जनप्रतिनिधि भी मूकदर्शक बनकर रह गए हैं। डीईओ कार्यालय के पास निजी लोगों के खाते कैसे आए और डीईओ कार्यालय ने इन खातों पर आरटीजीएस कैसे कराया है?

इसके खातेदार अब रकम वापस करने से पहले त्रुटि बता रहे हैं, लेकिन इन खातों के साथ जिन निजी स्कूलों के नाम हैं, उनका नाम कैसे आया? जो स्कूल बंद हो चुके हैं और जिनका कोई लेना-देना बाकी नहीं है, उनके नाम आरटीजीएस कराते समय कैसे अंकित किए गए? मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च स्तर के अधिकारी भी लीपापोती में जुट गए हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष क्रिस्टोफर पाल ने दोषियों के खिलाफ आर्थिक अनियमितता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इसके पहले भी कांकेर के तत्कालीन डीईओ एमआर खांडे ने भी अपने खाते में ही एक करोड़ 31 लाख स्र्पये जमा कर लिए थे, तब भी मामले की शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई थी।

यह है पूरा मामला

28 जनवरी 2021 को डीईओ कार्यालय से आठ निजी स्कूलों को आरटीई की राशि का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया गया है। इनमें ज्यादातर स्कूल दो से पांच साल पहले ही बंद हो चुके हैं। जिन स्कूलों को लाखों की राशि दी गई है, वहां आरटीई के एक भी बच्चे नहीं पढ़ रहे हैं, न ही कोई रकम ही बकाया थी।

पता चला कि ये राशि इन संस्थाओं के खाते में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत खाते में डाली गई है, जबकि राशि संस्थाओं के खाते में ही भेजने का प्रावधान है।

रायपुर में 27 हजार समेत प्रदेश में पौने तीन लाख बच्चे आरटीई में निश्शुल्क पढ़ रहे हैं। प्राइमरी में सात हजार, मिडिल स्कूल में 11 हजार स्र्पये प्रति बच्चों के हिसाब से सरकार निजी स्कूलों को फीस दे रही है। इसमें 60 फीसद राशि केंद्र और 40 फीसद राज्य सरकार वहन करती है।

स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने कहा कि मामले में विभाग के संचालक को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। कुछ कार्रवाई भी हुई है। आप पता कर लीजिए, प्रक्रिया तो चल रही है।

रायपुर संभाग के संयुक्त संचालक एसके भारद्वाज ने कहा कि प्रारंभिक जांच करके संचालनालय को मैंने जानकारी दी है। इसमें डीईओ कार्यालय के सहायक संचालक और विभागीय बाबू ने कोई नोटशीट तक भी नहीं दिखाई है।

Posted By: Kadir Khan

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