रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुसार स्कूली पाठ्यक्रम को रोजगारन्मुखी करने के लिए काम शुरू कर दिया है। नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ऐसे पाठ्यक्रम डिजाइन की जा रही है, जो रोजगार दे सके। इसके लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने व्यावसायिक पाठ्यक्रम बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय लेनी शुरू कर दी है। आने वाले शिक्षा सत्र में प्रदेश के सात लाख से अधिक विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के काबिल भी बनाया जाएगा।

ज्यादातर स्कूलों में कक्षा 11वीं-12वीं के पाठ्यक्रम के साथ आइटीआइ के पाठ्यक्रम को भी संबद्ध किया जा रहा है। स्कूली शिक्षा पूरी होते ही जैसे ही विद्यार्थी कालेज में जाएंगे, उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। एससीईआरटी के संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा है कि शिक्षा की उपयोगिता तभी सिद्ध होगी जब हम उसे व्यवसाय से जोड़ेंगे। विद्यार्थियों में विभिन्न प्रकार के कौशलों का विकास करेंगे तो वे जब शिक्षा ग्रहण करने निकलेंगे तब उनके हाथ में रोजगार होगा। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के पाठ्यपुस्तकों में दिए गए विषयवस्तु को व्यवसाय से किस प्रकार संबद्ध किया जा सकता है, विषयवार उन कौशलों की पहचान की जा रही है, जिन्हें विद्यार्थियों में विकसित किया जाना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी है प्रविधान

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ही प्रविधान है कि हमारी शिक्षा ऐसी हो जो समाज को एक बेहतर नागरिक देने के उद्देश्य को पूर्ण कर सके। शिक्षण पद्धति ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ विषय आधारित हो अपितु विद्यार्थियों को रोजगार के नए-नए अवसर प्रदान कर सके। जिन विषयों को व्यावसायिक कौशल के रूप में चयनित किया गया है, उनमें हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। विद्यार्थियों में विभिन्न कौशल जैसे लेखन, वक्ता, अभिनय, मूर्तिकला, काष्ठ कला, गीत, नृत्य, संगीत आदि कौशलों का विकास करने के लिए भी पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा।

Posted By: Vinita Sinha

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