रायपुर। छत्तीसगढ़ के दामोदर गणेश बापट और पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी को पद्मश्री अलंकरण दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गुस्र्वार को गृहमंत्रालय ने इनके नामों की घोषणा की। बापट को समाज सेवा के लिए व चतुर्वेदी को साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह अलंकरण दिया जाएगा।

समाज सेवी बापट जांजगीर-चांपा और चतुर्वेदी बिलासपुर के रहने वाले हैं। इनका अलंकरण समारोह इस वर्ष मार्च या अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राष्ट्रीय अलंकरण के लिए चयनित राज्य के वरिष्ठ समाज सेवी बापट व चतुर्वेदी को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

कुष्ठ पीड़ितों की सेवा में समर्पित बापट

बापट चांपा से आठ किलोमीटर दूर ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों की सेवा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। इस कुष्ठ आश्रम की स्थापना सन 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे ने की थी। वहां वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता बापट सन 1972 में पहुंचे और कात्रे जी के साथ मिलकर उन्होंने कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास के लिए सेवा के अनेक प्रकल्पों की शुरूआत की।

75 वर्षों से साहित्य साधना में जुटे चतुर्वेदी

चतुर्वेदी करीब 75 वर्षों से साहित्य साधना के जरिए हिन्दी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी मूल्यवान सेवाएं दी हैं। चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे मूलरूप से तत्कालीन अविभाजित बिलासपुर जिले के ग्राम कोटमी सोनार (वर्तमान में जिला जांजगीर-चांपा) के निवासी है, लेकिन साहित्यकार और पत्रकार के रूप में बिलासपुर उनकी कर्मभूमि है।