संजीत कुमार, रायपुर। देश की बिजली वितरण कंपनियों पर उत्पादकों की देनदारी 54705 करोड़ स्र्पये तक पहुंच गई है। यह बकाया बीते दो से ढ़ाई साल से लगातार बना हुआ है। सबसे ज्यादा बकाया 19857 करोड़ राजस्थान की वितरण कंपनी पर है। इस सूची में तमिलनाडु दूसरे और उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है। इन सब के बीच छत्तीसगढ़ पर एक निजी उत्पादन कंपनी का सिर्फ 12 करोड़ स्र्पये का बकाया है। छत्तीसगढ़ से बेहतर स्थिति में देश के केवल दो ही राज्य हैं। इनमें चंडीगढ़ पर कोई बकाया नहीं है, जबकि बंगाल पर केवल नौ करोड़ स्र्पये की देनदारी है।

बिजली अफसरों के अनुसार एक देश एक ग्रिड व्यवस्था लागू होने के बाद से पूरे देश में बिजली की भरपूर उपलब्धता है। कोई भी राज्य महज कुछ घंटें की नोटिस पर जितनी चाहे उतनी बिजली हासिल कर सकता है।

केंद्र सरकार ने एक देश एक ग्रिड का सिस्टम लागू करने के साथ इसके माध्यम से होने वाली बिजली की खरीद- बिक्री के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। इसके तहत बिजली खरीदने वाली कंपनियों को 60 दिन की अवधि (ग्रेस पीरियड) उपलब्ध कराती हैं। 54705 करोड़ की यह राशि 60 दिन के ग्रेड पीरियड के बाद की है।

हर महीने दो से सवा दो सौ करोड़ की खरीद

छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी चालू वित्तीय वर्ष के शुस्र्आत चार महीनों में हर माह दो सौ से सवा दौ सौ करोड़ स्र्पये की बिजली की खरीद की है। कंपनी इसके एवज में हर महीने मोटी रकम अदा भी करती है। इसके बावजूद राज्य की वितरण कंपनी पर 443 करोड़ स्र्पये का बकाया है। इसमें से 12 करोड़ की राशि ही 60 दिन से अधिक समय से बकाया है।

जून में छह करोड़ था बकाया

राज्य की बिजली वितरण कंपनी पर जून के अंत में कुल बकाया राशि में केवल छह करोड़ स्र्पये ही ऐसा था, जो 60 दिन से अधिक पुराना था। जुलाई के अंत में यह राशि बढ़कर 12 करोड़ स्र्पये हो गई है। बिजली अफसरों के अनुसार यह उतार-चढ़ाव लगा रहता है। इससे क्रेडिट पर कोई असर नहीं पड़ता।

प्रमुख राज्यों पर बकाया की स्थिति

राज्य राशि कितने दिनों से बकाया

राजस्थान 19857 820

तमिलनाडु 10084 791

उत्तर प्रदेश 5890 483

तेलंगाना 4445 798

मध्यप्रदेश 878 805

बिहार 229 820

छत्तीसगढ़ में चालू वित्तीय वर्ष की बिलिंग

माह बिलिंग

अप्रैल 2019 231 करोड़

मई 2019 238 करोड़

जून 2019 228 करोड़

जुलाई 2019 257 करोड़

ओवर ड्यू

माह राशि

जुलाई 2018 49.36

अगस्त 2018 8.56

सितंबर 2018 7.66

अक्टूबर 2018 07.03

नवंबर 2018 09.38

दिसंबर 2018 11.22

जनवरी 2019 10.32

फरवरी 2019 13.13

मार्च 2019 13.37

अप्रैल 2019 10.18

मई 2019 07.65

जून 2019 06.07

जुलाई 2019 12. 27

(नोट- आंकड़े करोड़ रुपए में)