रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

चीन से विवाद और कोरोना से उपजे हालात ने छत्तीसगढ़ की महिलाओं को नई राह दिखाई है। चीन से आने वाले तमाम उत्पाद को पछाड़ते हुए स्थानीय स्तर पर देसी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से राखियों पर बिल्कुल नए तरह के प्रयोग हुए। छत्तीसगढ़ में स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने चायनीज राखी के विकल्प के तौर पर सब्जियों के बीज, गोबर, बांस और छिंद की पत्तियों से राखियां तैयार की हैं। इस बार भाई-बहन के स्नेह भरे रक्षाबंधन पर्व पर इन राखियों को स्थानीय के साथ अन्य राज्यों में बाजार भी मिला। कलाई में इस बार देसी राखियां बंधेंगी। नक्सलगढ़ की महिलाओं द्वारा छिंद की नरम पत्तियों से तैयार हर्बल राखियां भी आकर्षक हैं। व्यापारियों ने भी इन राखियों में रुचि दिखाई है। वहीं समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं रोजगार मिलने से आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं।

केस 01

सब्जियों के बीज से तैयार ईको फ्रैंडली राखी

रायपुर जिला पंचायत विभाग के सेरीखेड़ी डोम में उज्ज्वला ग्राम संगठन से जुड़ी समूह की महिलाएं पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिहाज से लौकी, करेला, कद्दू , नेनुआ जैसी लतादार हरी सब्जियों के बीज से लगभग 15 हजार ईको फ्रैंडली राखी तैयार की है। समूह से जुड़ी महिला मोहनी ने बताया कि 20 से 100 रुपये तक की राखियां तैयार की गईं, जिनकी कई छोटे-बड़े कारोबारियों ने एडवांस बुकिंग की थी। इस तरह से राखी की बिक्री से अस्सी हजार रुपये से अधिक की आय विभाग को हुई है। समूह से जुड़ी हर महिला को रोजाना 200 रुपये के हिसाब से महीने में छह हजार रुपये की आय हुई।

हर्बल राखी बाजार में पहुंचती ही बिकी ( फोटो )

कृषि विज्ञान केंद्र दंतेवाड़ा के माध्यम से घोर नक्सल प्रभावित ग्राम झोडियाबाडम में झारा नंद पुरिन माता महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने पहली बार छिंद की नरम पत्तियों से हर्बल राखी तैयार की। स्थानीय बाजार में 30 से 50 रुपये में राखी की काफी मांग रही। समूह की अध्यक्ष शर्मीली नाग ने बताया कि रक्षाबंधन से महज दस दिन पहले राखी तैयार करना शुरू किया गया। हर्बल राखी तैयार कर बाजार में पहुंचते ही बिक्री हो जाती है। दस हजार राखी की बिक्री कर 30 हजार रुपये की कमाई हुई है। राजधानी के अलावा मध्यप्रदेश से भी हर्बल राखी की मांग आई है।

गोबर की राखी खरीदने के लिए उमड़ी भीड़

धमतरी में छाती ग्राम समूह संगठन की महिलाओं ने पहली बार गोबर और बांस से विभिन्ना तरह की राखियां तैयार की हैं, जिन्हें खरीदने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ खरीदी सेंटर में कुछ दिन पहले से शुरू हो गई थी। समूह अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने बताया कि सेंटर में में सभी वर्गों के लिए राखियां तैयार की गई थीं। 19 हजार राखियां तैयार की गईं। जिनमें से केवल आठ सौ तक राखियां बची हैं।

स्थानीय बाजार में देसी राखियों की चमक

चाइना से आ रही राखियों की तुलना में इस बार समूह के माध्यम से तैयार देसी राखियों की मांग अधिक रही, क्योंकि हर जिले के व्यापारी संगठन ने भी देसी राखी की मांग पहले ही समूह से की थी। इससे स्थानीय बाजार में देसी राखियों की चमक रही। इससे शहर की अपेक्षा गांव में देसी को काफी पसंद किया गया।

इनपुट

प्रत्येक समूह में दस से पंद्रह महिला शामिल।

राखी तैयार करने से लेकर स्टॉल तक दो समूह।

प्रत्येक महिला को रोजाना 200 रुपये मानदेय।

जिला पंचायत विभाग की सामग्री से लेकर बेचने की जिम्मेदारी।

बाजार में प्रमुख रूप से चार तरह की देसी राखियां मौजूद।

10 से 25 हजार राखी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था।

दस रुपये से लेकर 100 रुपये राखी के दाम।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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