रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में आज की उमस भरी शाम कुछ शीतल होती जान पड़ी तो कारण बना वृंदावन से आए संत विजय कौशल का सारगर्भित व्याख्यान। ब्रज मंडल में आए बदलाव की सुखद कहानी उन्होंने बताई। खासकर आग्रह किया किया कि वे आएं और ब्रज की सेवा करिये। वहाँ के भोजनालय से जुड़ने का आग्रह किया।

आज के व्याख्यान का विषय था- ब्रज में आई बदलाव की सुखद बयार। संतश्री ने ब्रज के संदर्भ में बताया कि ब्रज की एक और ख़ासियत है। वहां प्रत्येक घर-गांव में ठाकुरजी की लीलाएं हुई हैं। मणिपुर असम, बंगाल और ओडिश्ाा के साधु निवास करते हैं।

दूसरी बड़ी बात है विधवा माताएं वहां रहती हैं। ब्रज में उन्हें आश्रय मिलता है। वे ब्रजमंडल की होकर रह जाती हैं, लेकिन ब्रज मंडल में नशा की कुरीतियां जड़ जमा रही थीं। ब्रज आर्थिक रूप से सम्पन्ना नहीं है। अभावों का प्रदेश है। वहां बेहतर स्वास्थ्य की व्यवस्था हो, इसे लेकर हमारे आश्रम ने एक मिशन आरंभ किया। इसके लिए 120 बीघे का अपना आश्रम हमने उन्हें समर्पित कर दिया।

कैसे ब्रज के लिए पुण्यात्माओं ने तन, मन, धन समर्पित कर दिए। दूसरी पीड़ा थी मेरे मन में तीर्थो को लेकर। ब्रज ऐसा तीर्थ है, जहां वर्ष भर आवागमन होता रहता है। सक्षम समाज, जो दर्शनार्थियों के रूप में आते थे, उनके लिए तो सब कुछ था, लेकिन गरीब तीर्थ यात्रियों के लिए कुछ भी नहीं।

समता कालोनी स्थित मैक आडिटोरियम में व्याख्यान से पूर्व वृंदावन की ही टोली ने हरेकृष्ण की रस वर्षा से सभागार में मौजूद सभी को रससिक्त कर दिया। दीप प्रज्वलन आदि में सहयोग दिया सर्वश्री सीताराम अग्रवाल, कृणाल जैन, कांता सिंघानिया, डा. एके तिवारी ने।

प्रल्हाद राय-राजिम, नारायण भुसानिया, मोहन अग्रवाल- सक्ती, मुराली लाल अग्रवाल- बरगढ़, लडू गोपाल- भीमसरिया, ईश्वर अग्रवाल एवं शताब्दी पांडेय-रायपुर ने पुष्प अर्पित किया। व्याख्यान से पूर्व-बलदेव भाई शर्मा ने कबीर का पद गाया।

Posted By: Ravindra Thengdi

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