रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Sudhanshu Maharaj Ka Pravachan: गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन सुधांशु महाराज से सैकड़ों लोगों ने गुरु मंत्र दीक्षा ग्रहण की। सुधांशु महाराज ने मंत्र दीक्षा से साधना का ज्ञान दिया और प्रतिदिन नियमानुसार माला जाप करने का कहा। सुधांशु महाराज ने कहा कि प्रतिदिन ग्यारह माला का मंत्र जाप करना चाहिए।

सुधांशु महाराज ने परसदा जिला दुर्ग में निर्माणाधीन ब्रम्हलोक आश्रम में हो रहे निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यहां 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित किए जाएंगे। माता रानी के नौ रूपों की स्थापना होगी। वैष्णोदेवी की स्थापना के साथ ही आश्रम में कैलाश मानसरोवर की विशाल आकृति बनाई जाएगी, जिसमें शिव पार्वती विराजमान रहेंगे।

ब्रम्हलोक आश्रम परिसर में भव्य झरना निर्माण के साथ प्रतिदिन लेजर शो किए जाने की जानकारी देते हुए कहा की ब्रम्हलोक में निर्मित तीर्थों के दर्शन पर जो अनुभूति होगी, वो मूल स्थान में दर्शन लाभ का एहसास कराएगी। इस निर्माण कार्य में करीब एक करोड़ रुपए खर्च होने की की बात कही, जिसके लिए यथासभंव सहयोग की अपील की गई।

सुधांशु महाराज का दो दिवसीय सत्संग कार्यक्रम का समापन हुआ। ब्रम्हलोक आश्रम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन सुबह के सत्र में हजारों की संख्या में पादुका पूजन में शामिल हुए लोगों ने गुरु दर्शन का लाभ लिया। दोपहर में सैकड़ों लोगों ने सुधांशु महाराज से मंत्र दीक्षा लिया।

दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतिम दिन सुबह के सत्र में सुधांशु महाराज के हजारों शिष्यों ने कतारबद्ध होकर पादुका पूजन किया। सुधांशु महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर ने संसार को द्वंद मय बनाया, जैसे संयोग के साथ वियोग, सुख- दुख, गिला-सूखा, एक-दूसरे के विपरीत बातें, अनुकूल-प्रतिकूल स्थितियां, सौभाग्य- दुर्भाग्य, सत्संग ना होने से दुर्भाग्य बुद्धि पर पर्दा डाल देती है तो आप चूक जाते है पर गुरु के होने से आप सौभाग्यशाली बन सकते हैं। सद्गुरु अंदर से नसीब जगाते है, अवसर दिलाते है, अवसर बनाते है पर अवसर का लाभ उठाना निर्भर करता है, गुरु भ्रम को मिटाते हैं।

गुरु से मिली ज्ञान की किरणें हमें जिंदगी जीने के साथ ही अपने कर्मों के माध्यम से लोक परलोक सुधारने का रास्ता दिखाती है, क्योंकि दुनियां कर्म कांड में उलझा कर रखती है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के द्वितीय दिन समापन सत्र की शुरुआत सुधांशु महाराज ने गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा । गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: श्लोक पाठ के साथ कि जिसपर सत्संग स्थल में मौजूद हजारों लोगों की करतल ध्वनि होने के बाद मधुर कर्णप्रिय भजन का श्रवणलाभ लोगों को मिला।

सभी का घर हो परिवार प्रेम का मंदिर

सुधांशु महाराज ने कहा कि सभी का घर-परिवार प्रेम का मंदिर होना चाहिए। घर के सभी सदस्यों के साथ मिल बैठकर प्रेम के दो बोल बोलने से घर खुशहाल हो जाएगा। इंसान को दिमाग में शांति, चेहरे पर मुस्कान, जबान में मिठास और हृदय में प्रेम रखना चाहिए। युवाओं के लिए सुधांशु महाराज ने कहा कि अनावश्यक कार्यों में, फालतू की बातों में अपने वक़्त को बर्बाद मत करो, नहीं तो जिंदगी तमाशा बन जाएगी, मजा सजा बन जाएगी। गुजरा हुआ वक्त लौटकर नही आता इसलिए भविष्य में पछताना पड़े कभी ऐसा कोई ऐसा कार्य मत करो।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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