रायपुर। छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए सरकार ने न्यायिक जांच आयोग के बिंदु तय किए हैं। सरकार ने झीरम घाटी हमले की राजनीतिक साजिश की जांच के लिए नए सिरे से पहल की है।

अब न्यायिक जांच आयोग इस बात की पड़ताल करेगा कि सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण और रिहाई में किस तरह के समझौते नक्सलियों के साथ किए गए थे। क्या उनका संबंध कांग्रेस के कद्दावर नेता और बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की सुरक्षा से था।

यही नहीं, आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि नक्सली किसी बड़े आदमी को बंधक बनाने के बाद उन्हें रिहा करने के बदले क्या अपनी मांग मनवाने का प्रयास करते रहे हैं। कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल के बंधक होने के समय ऐसा नहीं करने का क्या कारण था।

न्यायिक जांच आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के बड़े नेताओं की हत्या हुई। उस समय यह बात सामने आई थी कि नक्सलियों ने काफिले को घेरने के बाद महेंद्र कर्मा की खोज की। उनकी खोज के बाद नक्सलियों ने कर्मा को गोली मारी। यही नहीं, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल को नक्सलियों ने पहाड़ी के पीछे बंधक बनाया।

कर्मा की मौत के काफी समय बाद नक्सलियों ने पटेल की हत्या की। ऐसे में अब जांच आयोग इसकी पड़ताल करेगा कि पटेल को बंधक बनाने और बाद में हत्या करने के पीछे क्या साजिश थी। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में महेंद्र कर्मा को पर्याप्त सुरक्षा दी गई कि नहीं, इसकी भी जांच होगी।


सात सवालों की अब शुरू हुई तलाश

आयोग के सामने सात सवाल रखे गए हैं। इसमें नवंबर 2012 में महेंद्र कर्मा पर हुए हमले के बाद क्या उनकी सुरक्षा की समीक्षा प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप ने किया था। हमले के बाद कर्मा की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा की मांग पर किस स्तर पर विचार किया गया। उस पर क्या कार्रवाई की गई।

गरियाबंद में जुलाई 2011 में नंदकुमार पटेल के काफिले पर हुए हमले के बाद क्या पटेल और उनके काफिले की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। क्या उन अतिरिक्त सुरक्षा मानकों का पालन झीरम घाटी घटना के दौरान किया गया।


परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा की होगी जांच

आयोग परिवर्तन यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई गई सुरक्षा की भी जांच करेगा। 25 मई 2013 को बस्तर जिले में कुल कितना पुलिस बल मौजूद था। क्या परिवर्तन यात्रा कार्यक्रम की अवधि में बस्तर से पुलिसबल दूसरे जिलों में भेजा गया। यदि भेजा गया, तो किस कारण से और किसके आदेश से।

क्या इसके लिए सक्षम स्वीकृति प्राप्त की गई। नक्सलियों की टीसीओसी के दौराान यूनिफाइड कमांग किस तरह अपनी भूमिका निभाती थी। यूनिफाइड कमांड के अध्यक्ष के कर्तव्य क्या थे और क्या यूनिफाइड कमांड के तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने उप कर्तव्यों का उपयुक्त निर्वहन किया।


क्या सुरक्षा के निर्देशों का पालन हुआ?

आयोग सुरक्षा के निर्देशों के पालन की भी जांच करेगा। क्या राज्य में नक्सलियों के द्वारा पूर्व में किए बड़े हमले को ध्यान में रखते हुए नक्सली इलाकों में यात्रा के लिए किसी निर्धारित संख्या में उससे अधिक बल प्रदान करने के कोई दिशा-निर्देश थे। यहां हां तो उनका पालन किया गया। यदि नहीं, तो क्या पूर्व के बड़े हमलों की समीक्षा कर कोई कदम उठाए गए।

Posted By: Hemant Upadhyay