रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी पाने के लिए दिव्यांगों को अब मेडिकल बोर्ड का सामना करना पड़ेगा। पूरी जांच-पड़ताल के बाद बोर्ड दिव्यांगता प्रमाणित करेंगे इसके बाद ही नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। अब तक केवल दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर ही नौकरी मिल जाती थी। यह व्यवस्था हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद लागू की गई है।

अफसरों के अनुसार एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में आदेश दिया है। इसके आधार पर मुख्य सचिव सुनील कुजूर ने सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के माध्यम से सभी विभागों को निर्देश जारी किया है।

इसमें कहा गया है कि दिव्यांगजनों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और रोजगार (सरकारी सेवाओं में भर्ती) का लाभ देने के पहले जिला मेडिकल बोर्ड से जारी प्रमाण पत्र का सूक्ष्म परीक्षण कराया जाए। यह सुनिश्चित करें कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र निशक्त व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप है और उसका उपयोग वास्तविक दिव्यांगजन ही कर सकें।

यह है मामला

अफसरों के अनुसार दिव्यांग राधा कृष्ण गोपाल ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दिव्यांगता प्रमाण पत्र के दुस्र्पयोग को रोकने का आग्रह किया था। गोपाल का आरोप था कि बड़ी संख्या में फर्जी दिव्यांग नौकरी कर रहे हैं।

दर्जन भर से अधिक लोग बहरा होने का प्रमाण पत्र लेकर सरकारी सेवा में हैं, जबकि वे हमेशा मोबाइल पर बातचीत करते दिखते हैं। दृष्टि बाधित दिव्यांग का प्रमाण पत्र लेकर नौकरी हासिल की है, दूसरी ओर उन्हें जिला परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया है।

Posted By: Sandeep Chourey