रायपुर। मेडिकल सीटों के आरक्षण रोस्टर, सीट आवंटन से लेकर भर्ती की प्रक्रिया में लगातार मिलती शिकायतों से चिकित्सा शिक्षा विभाग विश्वसनीयता खोता जा रहा है। भटकते छात्र व पालकों को प्रवेश को लेकर शिकायतों व समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी उन्हें कहने लगे हैं गलत लग रहा तो कोर्ट चले जाओ वहीं निपटेंगे। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से लेकर स्वास्थ्य सचिव की चुप्पी ने एक तरह से विभाग के अधिकारियों को अभयदान दे दिया है। बता दें पहला ममला मेडिकल के स्नातकोत्तर सीटों के आवंटन में डाक्टर रवि जांगड़े को फर्जीवाड़ा कर सूची में टाप स्थान दे दिया।

विभागीय सूत्रों ने ही बताया कि यह गलती जानबूझकर विभाग के कुछ अधिकारियों ने की थी। मामला सामने आने के बाद सूची संशोधित तक नहीं की गई। एमबीबीएस की सीटों के आरक्षण रोस्टर को गड़बड़ी हुई। इससे 60 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण आ गया। अनारक्षित की सीटें घटा दी गई। डीएमई के अधिकारी पहले की व्यवस्था को गलत बताते हुए इसे सही ठहरा दिए। जबकि कोर्ट ने पिछले वर्ष की काउंसलिंग को सही ठहराया था, ऐसे में हाई कोर्ट के फैसले तक को छूठा बोल रहे।

दूसरी सूची में भी सीटों की जानकारी नहीं मिल रही। नियम को तोड़मरोड़ प्रवेश दे रहे। मेडिकल प्रवेश मामले में एमबीबीएस को लेकर दो और एमडी प्रवेश के खिलाफ एक याचिका हाई कोर्ट में लगी है, जिसका फैसला जल्द आने वाला है। आरक्षण रोस्टर, सीट आवंटन में गड़बड़ी जैसी शिकायतों को लेकर शासन के खिलाफ कुछ संगठन भी कोर्ट जाने की तैयारी में है। बता दें एमबीबीएस सीटों में प्रवेश 27 नवंबर से प्रारंभ हो चुकी है। स्क्रुटनी की अंतिम तिथि तीन दिसंबर और प्रवेश की अंतिम तिथि चार दिसंबर तक है।

मेडिकल काउंसलिंग, प्रवेश को लेकर जो शिकायतें आ रही है। हम उसका निराकरण भी लगातार कर रहे हैं। पीजी मेरिट सूची में विभागीय त्रुटि हुई थी। एमबीबीएस में प्रवेश को लेकर जो भी समस्या है, उसे हल किया जाएगा।

-डा. विष्णु दत्त, संचालक, चिकित्सा शिक्षा विभाग

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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